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नीति आयोग और एबीबी ने आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देने हेतु समझौता किया

नीति आयोग और एबीबी इंडिया ने मेक इन इंडिया के तहत 23 मई 2018 को रोबोटिक और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के क्षेत्र में विकास हेतु एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.

भारत में रोबोटिक्स को बढ़ावा देने तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए देश में अधिक स्थान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह समझौता किया गया.

समझौते के मुख्य बिंदु

•    नीति आयोग एबीबी के साथ मिलकर इकोनॉमी के मुख्य सेक्टर जैसे बिजली और पानी का सेक्टर, इंडस्ट्रीज जैसे फूड, हैवी इंडस्ट्रीज सेक्टर और रेल मेट्रो सेक्टर के डिजिटलाइजेशन और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर काम करेंगी.

•    इस समझौते के तहत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर भी काम होगा. नीति आयोग और एबीबी सरकार के मंत्रियों के साथ मिलकर काम करेंगे.

•    इस दौरान फीडबैक, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और डिजिटलाइजेशन टेक्नोलॉजी पर मंथन किया जायेगा.

•    इस समझौते के तहत एबीबी का विश्वस्तरीय सेंटर भी डिजिटलाइजेशन की समझ में मददगार साबित होगा.

•    नीति आयोग पॉलिसीमेकर्स और सरकारी संस्थाओं को वर्कशॉप और ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल करेगा जो एबीबी की ओर से आयोजित किया जाएगा.

•    इन कार्यक्रमों में एक्सपर्ट शामिल होंगे जो आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की क्षमताओं पर बात करेंगे और बताएंगे कि किस तरह इससे उत्पादन क्षमता में क्रांति लाई जा सकती है.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence)

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या कृत्रिम बुद्धिमत्ता का अर्थ है कृत्रिम तरीक़े से विकसित की गई बौद्धिक क्षमता. इसे चार भागों में विभाजित किया जा सकता है, i) इंसान की तरह सोचना, ii) इंसान की तरह व्यवहार करना, iii) तर्क एवं विचारो युक्त तथ्यों को समझना एवं iv) तर्क एवं विचारों पर अपनी प्रतिक्रिया भी देना. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तौर पर रोबोटिक कार्य, शतरंज खेलने वाला कंप्यूटर, मशीनी आधारित गणनाएं एवं विश्लेषण आदि इसके प्रमुख उदारहण हैं.


एबीबी के बारे में
एबीबी का पूरा नाम एएसईए ब्राउन बॉवेरी है. यह मुख्यतः ऊर्जा और स्वचालन के क्षेत्रों में काम करने वाला एक स्विस-स्वीडिश बहुराष्ट्रीय निगम है. इसका मुख्यालय ज़्यूरिख़, स्विटज़रलैंड में है. एबीबी दुनिया की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग कंपनियों तथा सबसे बड़ी सामूहिक कंपनियों में से एक है. एबीबी विश्व के लगभग 100 देशों में कार्यरत है.

 

यह भी पढ़ें: मुद्रा योजना को बढ़ावा देने हेतु 40 कम्पनियों के साथ समझौता

 
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