अमिताव घोष को मिला 2018 का ज्ञानपीठ पुरस्कार

अंग्रेजी के प्रतिष्ठित साहित्यकार अमिताव घोष को वर्ष 2018 के लिए 54वां ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला है. ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित होने वाले वे अंग्रेजी के पहले लेखक हैं.

 ज्ञानपीठ द्वारा जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि 12 दिसंबर 2018 को प्रतिभा रॉय की अध्यक्षता में आयोजित ज्ञानपीठ चयन समिति की बैठक में अंग्रेजी के लेखक अमिताव घोष को वर्ष 2018 के लिए 54वां ज्ञानपीठ पुरस्कार देने का निर्णय लिया गया.

                                                       नोट:

ज्ञानपीठ के सूत्रों ने बताया कि अंग्रेजी को तीन साल पहले ज्ञानपीठ पुरस्कार की भाषा के रूप में शामिल किया गया था और अमिताव घोष देश के सर्वोच्च साहित्य पुरस्कार से सम्मानित होने वाले अंग्रेजी के पहले लेखक हैं.

देश के सर्वोच्च साहित्य सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार के रूप में अमिताव घोष को बतौर पुरस्कार 11 लाख रूपए की राशि, वाग्देवी की प्रतिमा और प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा.

 

ज्ञानपीठ पुरस्कार के बारे में:

  ज्ञानपीठ पुरस्कार भारतीय ज्ञानपीठ न्यास द्वारा भारतीय साहित्य के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार है.

  भारत का कोई भी नागरिक जो आठवीं अनुसूची में बताई गई 22 भाषाओं में से किसी भाषा में लिखता हो इस पुरस्कार के योग्य है.

  पुरस्कार में ग्यारह लाख रुपये की धनराशि,प्रशस्तिपत्र और वाग्देवी की कांस्य प्रतिमा दी जाती है.

  1965 में 1 लाख रुपये की पुरस्कार राशि से प्रारंभ हुए इस पुरस्कार को 2005 में 7 लाख रुपए कर दिया गया जो वर्तमान में ग्यारह लाख रुपये हो चुका है.

  2005 के लिए चुने गये हिन्दी साहित्यकार कुंवर नारायण पहले व्यक्ति थे जिन्हें 7 लाख रुपए का ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ.

  प्रथम ज्ञानपीठ पुरस्कार 1965 में मलयालम लेखक जी शंकर कुरुप को प्रदान किया गया था.

•  अब तक हिन्दी तथा कन्नड़ भाषा के लेखक सबसे अधिक सात बार यह पुरस्कार पा चुके हैं. यह पुरस्कार बांग्ला को 5 बार, मलयालम को 4 बार,उड़िया, उर्दू और गुजराती को तीन-तीन बार, असमिया, मराठी, तेलुगू, पंजाबी और तमिल को दो-दो बार मिल चुका है.

 

अमिताव घोष के बारे में:

  अमिताव घोष का जन्म 11 जुलाई 1956 को कोलकाता में हुआ था. वे दिल्ली के सेंट स्टीफेन कॉलेज और 'दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स' से उच्च शिक्षा ग्रहण किये.

  अमिताव घोष अंग्रेज़ी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं. इनके द्वारा रचित एक उपन्यास द शैडो लाइन्स के लिये उन्हें वर्ष 1989 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया. घोष साहित्य अकादमी और पद्मश्री सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं.

  उनकी प्रमुख रचनाओं में 'द सर्किल ऑफ रीजन', 'दे शेडो लाइन', 'द कलकत्ता क्रोमोसोम', 'द ग्लास पैलेस', 'द हंगरी टाइड', 'रिवर ऑफ स्मोक' और'फ्लड ऑफ फायर' प्रमुख हैं.

 

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