महंत नृत्य गोपाल दास बने राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए बने ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ की 19 फरवरी 2020 को पहली बैठक हुई है. इस बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए. महंत नृत्य गोपाल दास को राम मंदिर ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया गया. वहीं, विश्व हिन्दू परिषद (वीएचपी) के उपाध्यक्ष चंपत राय को महासचिव बनाया गया.

नृपेंद्र मिश्रा को भवन निर्माण समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. ट्रस्ट की हुई पहली बैठक में 9 प्रस्ताव भी पारित किए गए. गोविंद गिरी को मंदिर ट्रस्ट का कोषाध्यक्ष बनाया गया है. ये बैठक रामलला के वकील रहे केशवन अय्यंगर परासरण के दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित घर में हुई. बैठक में सभी मुद्दों पर चर्चा की गई.

कौन है महंत नृत्य गोपाल दास?

महंत नृत्य गोपाल दास का जन्म 11 जून 1938 को मथुरा के कहौला गॉव में हुआ था. उन्होंनें 12 साल की उम्र में ही वैराग्य धारण कर लिया और अयोध्या आ गए. वे महंत राममनोहर दास से दीक्षित थे. नृत्य गोपाल दास दशकों तक राम मंदिर आंदोलन के संरक्षक की भूमिका में रहे हैं. महंत नृत्‍य गोपाल दास साल 1984 से ही मंदिर आंदोलन से जुड़े हैं. उनकी अध्यक्षता में मंदिर कार्यशाला में राम मंदिर हेतु पत्थरों को तराशने का काम चला. विवादित ढांचा विध्वंस की घटना मे सीबीआई कोर्ट में उनपर आपराधिक धाराओं में केस भी चल रहा है. उनके मठ ‘मणिराम छावनी’ में पांच सौ साधुओं की जमात स्थाई तौर पर रहती है.

कौन है ट्रस्‍ट के महासचिव बनाए गए चंपत राय?

चंपत राय ने अपने करियर की शुरुआत भौतिक विज्ञान के प्रवक्‍ता से की. वे बिजनौर के एक कॉलेज में लेक्‍चरर भी रहे. वे इसके बाद संघ से जुड़ गए और प्रचारक की जिम्मेदारी संभाली. वे साल 1984 से वीएचपी के तत्‍कालीन अध्यक्ष अशोक सिंहल के विश्‍वासपात्र सहयोगी के रूप में मंदिर आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वे मंदिर आंदोलन की व्यवस्था और रणनीतिकारों के तौर पर जाने जाते हैं. वे वीएचपी की राम जन्म भूमि न्यास के मंत्री भी रहे हैं. मंदिर की अयोध्या ट्रस्‍ट का वित्तीय लेखा जोखा का नियंत्रण उनके ही हाथ में रहा है.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने 09 नवंबर 2019 को राम मंदिर विवाद पर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था. कोर्ट ने राम मंदिर विवाद से संबंधित भूमि का फैसला देते हुए पूरी जमीन का मालिकाना हक राम लला को दे दिया था. दूसरी तरफ, सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले में सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड को मस्जिद हेतु पांच एकड़ उपयुक्त ज़मीन दिए जाने का आदेश दिया था.

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