पद्मश्री से सम्मानित समाजसेवी दामोदर गणेश बापट का निधन

पद्मश्री से सम्मानित समाजसेवी दामोदर गणेश बापट का निधन हाल ही में हो गया. वे 87 वर्ष के थे. वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे.

कुष्ठ रोगियों हेतु आजीवन समर्पित रहे गणेश बापट को साल 2018 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया था. उन्होंने अपने देहदान का संकल्प लिया था, उस संकल्प के तहत मेडिकल कॉलेज को उनका देहदान किया जाएगा.

सोंठी आश्रम का निर्माण

गणेश बापट ने असहाय और मरीजों के लिए कात्रेनगर चांपा के सोंठी आश्रम का निर्माण किया था. उन्होंने चांपा के सोंठी आश्रम में भारतीय कुष्ठ निवारक संघ द्वारा संचालित आश्रम में कुष्ठ पीड़ितों की सेवा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था.

दामोदर गणेश बापट के बारे में

  दामोदर गणेश बापट छत्तीसगढ़ के रहने वाले एक समाज सेवक थे. उनके मन में बचपन से ही सेवा की भावना कूट-कूटकर भरी हुई थी. यही कारण है कि वे लगभग नौ वर्ष की आयु से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता रहे.

गणेश बापट के जीवन के शुरूआती दिन काफी संघर्ष और परेशानियों से भरा रहा. उन्होने अपने जीवन की शुरुआत एक शिक्षक के तौर पर की और आदिवासी बच्चों को पढ़ाने लगे.

चांपा से लगभग आठ किलोमीटर दूर ग्राम सोठी में भारतीय कुष्ठ निवारक संघ द्वारा संचालित आश्रम में कुष्ठ पीड़ितों की सेवा हेतु अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था. इस आश्रम की स्थापना साल 1962 में कुष्ठ पीड़ित सदाशिवराव गोविंदराव कात्रे ने की थी.

गणेश बापट ने कुष्ठ पीड़ितों के इलाज और उनके सामाजिक-आर्थिक पुनर्वास हेतु सेवा के अनेक योजनाओं की शुरूआत की. उन्होंने प्रमुख रूप से कुष्ठ रोग के प्रति लोगों को जागृत करने के अतिरिक्त कुष्ठ रोगियों की सेवा ओर आर्थिक व्यवस्था करने का कार्य किया है.

गणेश बापट मरीजों के साथ ही रहते थे और उनके हाथ से पकाया हुआ खाना भी खाया करते थे. खाने पीने के अतिरिक्त वे उनका दुख-दर्द भी साझा करते थे. उन्होंने लगभग 26 हजार मरीजों की जिंदगी संवारी है.

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