संसद से SC-ST आरक्षण से जुड़ा बिल पास, जाने इस बिल के बारे में

संसद ने 12 दिसंबर 2019 को अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति समुदायों को दिये गये आरक्षण से संबंधित बिल को मंजूरी दे दी है. राज्यसभा से संविधान संशोधन (126वां) बिल भी पास हो गया है.

ये बिल लोकसभा से पहले ही पास हो चुका है. इस विधेयक में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति समुदायों के आरक्षण को दस साल बढ़ाने का प्रावधान है.

निचले सदन में मत विभाजन में इस विधेयक के पक्ष में 352 मत पड़े और विरोध में एक भी वोट नहीं पड़ा. ऊपरी सदन में मत विभाजन में इस विधेयक के पक्ष में 163 मत पड़े और विरोध में एक भी वोट नहीं पड़ा.

आरक्षण से संबंधित मुख्य बिंदु:

• फिलहाल आरक्षण बिल 25 जनवरी 2020 को समाप्त हो रहा है. इसे बिल में 25 जनवरी 2030 तक बढ़ाने का प्रावधान है.

• केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति और जनजाति उपयोजना के लिए आबंटन बढ़ाकर 76 हजार करोड़ रुपये कर दिया है.

• संसद में एंग्लो इंडियन कोटे के तहत दो सीटों को भी खत्म करने का बिल में प्रावधान है. 70 साल से इस समुदाय के दो सदस्य सदन में प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं.

• यह एक संविधान संशोधन विधेयक है. इसमें सदन के 50 प्रतिशत सदस्यों का मौजूद होना तथा मौजूद सदस्यों में से दो तिहाई सदस्यों के समर्थन से इसको पारित किया जाना जरूरी है.

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बिल में क्या है?

आर्टिकल 334 में आरक्षण को शामिल किया गया है. आर्टिकल 334 कहता है कि एंग्लो-इंडियन, एससी और एसटी को दिए जाना वाला आरक्षण चालीस साल बाद खत्म हो जाएगा. इस खंड को साल 1949 में शामिल किया गया था. इसे चालीस सालों के बाद भी 10 वर्षों के विस्तार के साथ संशोधित किया जा रहा है.

पृष्ठभूमि

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और एंग्लो-इंडियन समुदाय को पिछले 70 वर्ष से मिल रहा आरक्षण 25 जनवरी 2020 को समाप्त हो रहा है. इस विधेयक में एससी और एसटी के संदर्भ में इसे दस वर्ष बढ़ाने का प्रावधान किया गया है.

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