प्रधानमंत्री मोदी ने एशिया के सबसे बड़े सोलर प्लांट का लोकार्पण किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 जुलाई 2020 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मध्य प्रदेश के रीवा में स्थापित 750 मेगावाट की सौर परियोजना राष्ट्र को समर्पित की है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत कई अन्य मंत्रियों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया है. इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि आज 'रीवा ने वाकई इतिहास रच दिया है.

मध्यप्रदेश के रीवा जिले में एशिया का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 750 मेगावाट के अल्ट्रा मेगा सौर ऊर्जा संयंत्र को राष्ट्र को समर्पित किया. इस सोलर प्लांट से मध्य प्रदेश के लोगों को, उद्योगों को तो बिजली मिलेगी ही, दिल्ली में मेट्रो रेल तक को इसका लाभ मिलेगा.

रीवा अल्ट्रा मेगा सौर परियोजना

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व कई केंद्रीय मंत्री भी इस इवेंट में शामिल हुए. इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश के सामर्थ्य पर विश्वास जताया और कहा कि यह विश्व की सुरक्षा का नींव है जो रीवा में रखा गया है क्योंकि पर्यावरण की स्वच्छता में इसका अहम योगदान होगा.

रीवा अल्ट्रा मेगा सौर ऊर्जा परियोजना मध्य प्रदेश के रीवा जिले में स्थित है. इसकी कुल सौर क्षमता 750 मेगावाट है. मध्य प्रदेश के रीवा जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर गुढ़ में 1590 एकड़ में यह सोलर प्लांट है. यह रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड, एमपी उर्जा विकास निगम लिमिटेड और भारत की सौर उर्जा निगम की एक ज्वाइंट वेंचर है.

परियोजना की कुल लागत लगभग 4000 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है. विश्व बैंक ने जनवरी 2018 में परियोजना के आंतरिक बुनियादी ढांचे के लिए 30 मिलियन अमरीकी डॉलर के ऋण को मंजूरी दी थी. प्लांट के अंदर सौर उर्जा से बिजली उत्पादन के लिए 3 यूनिट हैं. तीनों इकाइयों से 250-250 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा.

रिपोर्टों के अनुसार, रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर प्लांट द्वारा उत्पादित बिजली का लगभग 24 प्रतिशत दिल्ली मेट्रो रेल सेवाओं में जाएगा. इस परियोजना के शुरू हो जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रीवा का नाम स्थापित होगा. यह प्रोजेक्ट हर साल करीब 15 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर कार्बन उत्सर्जन को कम करेगी.

सबसे बड़ा सोलर प्लांट

इस परियोजना से मध्य प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी. एशिया में यह सबसे बड़ा सोलर प्लांट है. इससे बिजली वितरण कंपनियों/पावर मैनेजमेंट कंपनी को परियोजना अवधि में 4,700 करोड़ रुपये की बचत होगी. बिजली प्लांट से 76 फीसदी बिजली मध्य प्रदेश को और 24 फीसदी दिल्ली मेट्रो को दी जाएगी.

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