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प्रधानमंत्री मोदी को बांग्लादेश की आजादी की 50वीं सालगिरह के जश्न में शामिल होने का मिला न्यौता

आने वाली 26 मार्च, 2021 को देश की आजादी के 50 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में होने वाले जश्न में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बांग्लादेश की ओर से आमंत्रित किया गया है.

जब भारत के नव नियुक्त उच्चायुक्त, विक्रम डोराइस्वाई ने बांग्लादेश के ढाका में बांग्लादेश के विदेश मंत्री, ए.के. अब्दुल मोमन से एक शिष्टाचार मुलाकात की तब बांग्लादेश के विदेश मंत्री द्वारा यह खबर साझा की गई.

इस मुलाकात के दौरान, डॉ. मोमन ने कहा कि, भारत और बांग्लादेश वर्ष 2021 में बांग्लादेश की आजादी के 50 साल पूरे होने का जश्न एक साथ मनाएंगे और उन्हें उम्मीद है कि, भारत के प्रधानमंत्री मोदी ढाका में होने वाले समारोह में जरुर शामिल होंगे.

बांग्लादेश और भारत के बीच बेहतर हो रहे हैं संबंध

बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने बांग्लादेश की आजादी के 50 वें वर्ष का जश्न मनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर चर्चा करते हुए यह कहा कि, चर्चा और संवादों के माध्यम से अपने द्विपक्षीय मुद्दों को हल करके पड़ोसी देशों के बीच मौजूदा संबंधों को मधुर बनाने के माध्यम से हमने सारी दुनिया के लिए एक मिसाल कायम की है.

इस संदर्भ में, डॉ. मोमन एक उदाहरण के रूप में भूमि और समुद्री सीमा संबंधी मुद्दों का उल्लेख कर रहे थे. प्रधानमंत्री मोदी और उनके बांग्लादेश के समकक्ष के बीच एक आभासी बैठक भी वर्ष 2020 में होने की संभावना है.

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान के जन्म शताब्दी समारोह में शामिल होने के लिए बांग्लादेश जाने वाले थे, लेकिन मौजूदा कोविड ​​-19 महामारी के कारण उनकी यह यात्रा रद्द कर दी गई.

बांग्लादेश की स्वतंत्रता: पृष्ठभूमि

बांग्लादेश का स्वतंत्रता दिवस 26 मार्च को मनाया जाता है क्योंकि यह नेता शेख मुजीबुर रहमान द्वारा 26 मार्च 1971 की सुबह पाकिस्तान से देश की आजादी की याद दिलाता है.

इससे पहले, बांग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान था, पाकिस्तान के नवगठित डोमिनियन का एक हिस्सा था. वर्ष 1947 में भारत के विभाजन के समय, बंगाल के विभाजन के साथ पूर्वी पाकिस्तान का गठन किया गया था. इस क्षेत्र ने बाद में, राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक मतभेदों के कारण अपने अलग राष्ट्र की मांग शुरू कर दी थी.

बांग्लादेश के लोगों ने आजादी पाने के लिए पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में हिस्सा लिया था. इस आजादी को पाकिस्तान की सेना और उनके सहयोगियों के खिलाफ नौ महीने के गुरिल्ला युद्ध के माध्यम से हासिल किया गया था. बांग्लादेश सेना ने बाद में, भारतीय सेना के समर्थन के साथ पाकिस्तानी सेना को हरा दिया और 16 दिसंबर, 1971 को पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण के बाद यह युद्ध समाप्त कर दिया गया.

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