भारत में गरीबी दर कम होकर 28% पर पहुंची: बहु-आयामी निर्धनता सूचकांक

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम तथा ऑक्सफ़ोर्ड गरीबी उन्मूलन एवं मानव विकास पहल द्वारा हाल ही में अंतरराष्ट्रीय बहु-आयामी निर्धनता सूचकांक (Global Multidimensional Poverty Index) 2018 जारी किया गया. इस सूचकांक में बताया गया है कि भारत में पिछले दस वर्षों में निर्धनता दर 55 प्रतिशत से कम होकर 28 प्रतिशत पर आ गयी है.

भारत के संदर्भ में आंकड़े

  • आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2005-06 और 2015-16 के दौरान लगभग 271 मिलियन लोग गरीबी से बाहर आये.
  • वर्ष 2015-16 में भारत में 364 मिलियन निर्धन लोग थे जबकि इससे पहले 2005-06 में 635 मिलियन लोग गरीब थे.
  • सूचकांक द्वारा जारी जानकारी के अनुसार कुल निर्धन लोगों में 156 मिलियन बच्चे हैं.
  • अनुसूचित जनजाति समुदाय के 80 प्रतिशत लोग 2005-06 में निर्धन थे, जबकि 2015-16 के दौरान यह आंकड़ा कम होकर 50 प्रतिशत हो गया.
  • इस सूचकांक के अध्ययन के दौरान एकत्रित आंकड़ों में कहा गया है कि बिहार में 2015-16 में निर्धनता की दर सबसे अधिक थी.
  • चार सबसे निर्धन राज्यों बिहार झारखण्ड, उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश में 196 मिलियन निर्धन लोग हैं.

वैश्विक परिदृश्य

  • उप-सहारा अफ्रीका तथा दक्षिण एशिया में बहु-आयामी निर्धनता की दर काफी अधिक है. यदि इन दोनों इलाकों को मिला दिया जाये तो यहां विश्व के 83 प्रतिशत निर्धन लोग निवास करते हैं.
  • विकासशील देशों में तीन अरब लोग बहु-आयामी निर्धनता में निवास करते हैं, यह लोग स्वास्थ्य, शिक्षा तथा जीवन स्तर इत्यादि से वंचित हैं.
  • दो तिहाई बहु-आयामी निर्धन लोग मध्यम-आय वाले देशों में निवास करते हैं. लगभग 889 मिलियन लोगों को पोषण, शिक्षा तथा स्वच्छता जैसी मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित रहना पड़ता है.
  • दक्षिण सूडान तथा नाइजर में 93 प्रतिशत बच्चे निर्धनता में रहते हैं जबकि 35 देशों में लगभग बच्चों की आधी आबादी निर्धनता से पीड़ित है.

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