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राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने ‘सौर चरखा मिशन’ लॉन्च किया

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने 27 जून 2018 को संयुक्त राष्ट्र एमएसएमई दिवस के अवसर पर 'सौर चरखा मिशन' शुरू किया, ताकि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण आर्थिक भूमिका को चिह्नित किया जा सके.

सौर चरखा मिशन के बारे में:

  • सौर चरखा मिशन में 50 समूह शामिल होंगे.
  • यह मिशन कारीगरों को रोजगार देने के उद्देश्य से शुरू किया गया हैं.
  • यह मिशन 50 क्‍लस्‍टर को कवर करेगा तथा प्रत्‍येक क्‍लस्‍टर 400 से 2000 कारीगरों को नियुक्‍त करेगा.
  • इस मिशन को भारत सरकार द्वारा अनुमोदिन कर दिया गया है.
  • इस मिशन के लिए एमएसएमई मंत्रालय कारीगारों को 550 करोड़ रुपये की सब्सिडी वितरित करेगा.
  • सौर चरखा मिशन से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार पैदा होगा, जो पर्यावरण अनुकूल अर्थव्‍यवस्‍था में योगदान देगा.
  • सौर चरखा मिशन का मुख्य लक्ष्य देश भर में पांच करोड़ महिलाओं को जोड़ना है.
  • इस योजना के तहत, सरकार पहले दो वर्षों के दौरान एक लाख महिलाओं को नौकरियां देगी.
  • सौर चरखा मिशन 2018 के तहत महिलाओं के लिए एक नया काम पाने का एक शानदार अवसर होगा.
  • इस योजना को विशेष रूप से देश भर में महिलाओं के लिए लॉन्च किया गया हैं.

संपर्क पोर्टल:

  • राष्‍ट्रपति ने एमएसएमई मंत्रालय का ‘संपर्क’ नामक एक पोर्टल भी शुरू किया.
  • यह पोर्टल प्रतिभाशाली उद्यमियों और प्रशिक्षित लोगों की तलाश कर रहे उद्यमों के बीच सेतू का कार्य करेगा.

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई):

  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग वे उद्योग हैं जिनमें काम करने वालों की संख्या एक सीमा से कम होती है तथा उनका वार्षिक उत्पादन भी एक सीमा के अन्दर रहता है. किसी भी देश के विकास में इनका महत्वपूर्ण स्थान है.
  • भारत की अर्थव्यवस्था में एमएसएमई का कुल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष निर्यात में 45% हिस्सा है. केन्द्रीय या राज्य सरकार और बैंकिंग एमएसएमई अधिनियम के तहत लाभ को प्राप्त करने के लिए एमएसएमई पंजीकरण आवश्यक है.
  • एमएसएमई क्षेत्र उद्यमशीलता के लिए प्रजनन भूमि की तरह होता है, जोकि अक्‍सर वैयक्तिक सृजनशीलता और नवाचार से संचालित होता है. यह क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्‍पाद यानी जीडीपी में 8 फीसदी, विनिर्मित उत्‍पादन में 45 और इसके निर्यात में 40 फीसदी का योगदान देता है.
  • एमएसएमई क्षेत्र में वृहत उद्यमों की तुलना में रोजगार क्षमता और सकल वृद्धि बहुत ज्‍यादा होती है.
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