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अदेल अब्दुल महदी इराक के नए प्रधानमंत्री बने

अदेल अब्दुल महदी इराक के नए प्रधानमंत्री बन गए है. उन्होंने 24 अक्टूबर 2018 को इराक के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली. उनके साथ 22 कैबिनेट मंत्रियों में से 14 कैबिनेट मंत्रियों ने भी शपथ ली. इसके लिए संसद का अधिवेशन आधी रात के बाद तक चला.

आठ मंत्रालयों के बारे में अभी फैसला होना है, जो दो नवंबर की आखिरी तारीख से पहले लिया जाएगा. नए प्रधानमंत्री अदेल अब्दुल महदी के सामने इस्लामिक स्टेट संगठन के साथ संघर्ष के बाद देश के पुनर्निर्माण की भारी जिम्मेदारी है.

अदेल अब्दुल महदी के बारे में:

•   अदेल अब्दुल महदी का जन्म वर्ष 1942 में हुआ था.

•   वे वर्ष 2005 से वर्ष 2011 के बीच इराक के उप-राष्ट्रपति भी रहे.

•   वे वर्ष 2014 से वर्ष 2016 के दौरान देश के तेल मंत्री भी रहे.

•   इससे पूर्व देश के अंतरिम वित्त मंत्री भी रहे हैं. वे सुप्रीम इस्लामिक इराकी कौंसिल तथा इराकी कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य रह चुके हैं.

•   मेहदी इराक़ कम्युनिस्ट पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व में शामिल होने के बाद वर्ष 1980 तक इसके लिए काम करते रहे.

•   इसके बाद शिया समुदाय से आने वाले महदी ने ईरान के इस्लामिक विचारों को स्वीकार कर लिया.

•   इराक़ में चरमपंथी तत्व अब तक दो बार महदी को निशाना बना चुके हैं. ऐसी ही एक घटना में दस लोगों की मौत हुई थी.

कैबिनेट बनाने की जिम्मेदारी:

इराक के प्रधानमंत्री बनने के साथ ही महदी पर अपना कैबिनेट बनाने की जिम्मेदारी आ गई है जिसके लिए उन्होने सभी को मौका देने का मन बनाया है.

वेबसाइट लॉन्च:

उन्होंने अपने मंत्रिमंडल में इराक़ी नागरिकों को शामिल करने के लिए एक वेबसाइट लॉन्च की है. अब्दुल महदी ने इराक़ के आम लोगों को आमंत्रित करते हुए कहा है कि जिन लोगों के पास काम करने का अनुभव और कौशल हो, वे नई सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए आवेदन कर सकते हैं.

नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती:

सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार एक बड़ी समस्या है और सरकार बीते कुछ सालों में अपने नागरिकों को आम सुविधाएं देने में असफल रही है. बीते कई सालों से जारी हिंसक संघर्ष के बाद इराक़ का आधारभूत ढांचा बुरी तरह से प्रभावित हुआ है.

इसकी वजह से कई बार इराक़ी लोगों ने सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किए हैं. ऐसे में इराक़ की नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये होगी कि वह इराक़ी जनता का भरोसा जीत सके.

यह भी पढ़ें: भारत, अफगानिस्तान और ईरान ने चाबहार बंदरगाह परियोजना पर पहली त्रिपक्षीय बैठक की

 
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