RBI ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में नहीं किया कोई बदलाव

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने छह-सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन-दिवसीय बैठक के बाद 06 अगस्त 2020 को रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किए जाने की घोषणा की. रेपो रेट को चार प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है. आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है.

गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि रेपो रेट को 4 प्रतिशत और रिवर्स रेपो रेट को 3.3 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है. लेकिन उन्होंने कहा कि भविष्य में कोविड-19 संकट की मार झेल रही अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए जरूरत पड़ने पर दरों में और अधिक कटौती की जा सकती है.

रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट क्या है?

आरबीआई बैंकों को जिस रेट पर कर्ज देता है उसे रेपो रेट कहते है. इसी आधार पर बैंक भी ग्राहकों को कर्ज मुहैया कराते हैं. रेपो रेट कम होने से बैंकों को बड़ी राहत मिलती है. बैंक भी इसके बाद कर्ज को कम ब्‍याज दर पर ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं.

रिवर्स रेपो रेट वह दर होती है जिस पर बैंकों को उनकी ओर से आरबीआई में जमा धन पर ब्याज मिलता है. बाजारों में नकदी की तरलता को नियंत्रित करने में रिवर्स रेपो रेट काम आती है. नकदी बाजार में जब भी बहुत ज्यादा दिखाई देती है तो आरबीआई रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देता है, जिससे की बैंक ज्यादा ब्याज कमाने हेतु अपनी रकम उसके पास जमा करा दे.

आरबीआई ने कब बदलाव किया था

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पिछली 22 मई 2020 को अपनी नीतिगत दर में बदलाव किया था. आरबीआई ने बैंकर्स और उद्योग की मांग पर कॉरपोरेट कंपनियों के लिए कर्ज पुनर्गठन की सुविधा की 06 अगस्त 2020 को घोषणा की. आरबीआई गवर्नर ने बताया कि सात जून 2020 को जारी प्रूडेंशियल फ्रेमवर्क के आधार पर पुनर्गठन की अनुमति दी जाएगी.

आरबीआई पहले ही फरवरी से लेकर अब तक रेपो रेट में 1.15 प्रतिशत की कटौती कर चुका है. इससे पहले आरबीआई ने पिछले साल रेपो रेट में 1.35 प्रतिशत की कटौती की थी.

आरबीआई गवर्नर ने क्या कहा?

आरबीआई गवर्नर ने यह भी कहा कि आने वाले समय में अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने की उम्मीद अभी भी कम ही है और ये बुरी खबर इसलिए है क्योंकि कोविड-19 के मामलों में कमी की बजाए बढ़ोतरी हो रही है.

एमपीसी की 24वीं बैठक

आरबीआई के गवर्नर की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) छह अगस्त को मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा करेगी. यह एमपीसी की 24वीं बैठक है. हालांकि नीतिगत दर में कटौती को लेकर विशेषज्ञों की राय अलग-अलग है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय कोविड-19 के प्रभाव से निपटने के लिये कर्ज पुनर्गठन ज्यादा जरूरी है.

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