प्रसिद्ध इतिहासकार और जामिया के पूर्व कुलपति मुशीरुल हसन का निधन

प्रसिद्ध शिक्षाविद, इतिहासकार एवं जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर मुशीरुल हसन का 10 दिसंबर 2018 को निधन हो गया. वे पिछले कई वर्षों से बीमार चल रहे थे. उनकी आयु 70 वर्ष की थी.

उन्हें विभाजन तथा दक्षिण एशिया में इस्लाम के इतिहास को लेकर किये गये उनके काम के लिए जाना जाता है. मुशीरुल वर्ष 2004 से 2009 तक जामिया मिलिया इस्लामिया में कुलपति रहे थे.

मुशीरुल हसन के बारे में जानकारी

•    प्रोफेसर मुशीरुल हसन का जन्म 15 अगस्त 1947 को हुआ था.

•    उन्होंने अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय और कैंब्रिज विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की थी.

•    वे 1992 से 1996 के बीच जामिया मिल्लिया इस्लामिया के उप-कुलपति रहे और 2004 से 2009 के बीच कुलपति.

•    वे भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार के महानिदेशक रह चुके थे. उन्होंने भारत विभाजन और दक्षिण-एशिया में इस्लाम के इतिहास पर बहुत ही महत्वपूर्ण काम किया है.

•    प्रोफेसर मुशीरुल हसन सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में अपने महत्त्वपूर्ण योगदान को लिए जाने जाते हैं.

•    वे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज के उपाध्यक्ष के साथ-साथ ईरान स्थित दूतावास में इंडो-ईरान सोसाइटी के पूर्व अध्यक्ष और 2002 में भारतीय इतिहास कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके थे.

•    इसके अतिरिक्त वे भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार के निदेशक भी रह चुके हैं.

•    उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है.

जामिया मिलिया इस्लामिया

जामिया मिलिया इस्लामिया संयुक्त प्रांत, भारत के अलीगढ़ में मूल रूप से 1920 में एक संस्था के रूप में स्थापित किया गया. वर्ष 1988 में भारतीय संसद के अधिनियम द्वारा एक केंद्रीय विश्वविद्यालय बना. उर्दू भाषा, में जामिया का अर्थ है विश्वविद्यालय, और मिल्लिया का अर्थ है 'राष्ट्रीय'. दिसंबर 1988 में संसद के एक विशेष अधिनियम के द्वारा जामिया मिल्लिया इस्लामिया भारत का एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय बनाया गया.

 

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