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शोधकर्ताओं ने पहली बार 3डी प्रिंटेड कॉर्निया विकसित किया

वैज्ञानिकों ने पहली बार 3डी प्रिंटेड मानव आँख का कॉर्निया बनाया है. इससे नेत्रदान करने वालों की कमी दूर करने और दृष्टि बाधित लाखों लोगों को रोशनी लौटाने में मदद मिल सकती है.

यह खोज एक्सपेरिमेंटल आई रिसर्च नामक पत्रिका में प्रकाशित हुई है. इसमें बताया गया है कि किस तरह से किसी स्वस्थ दानकर्ता के कॉर्निया की स्टेम सेल को एकसाथ मिलाकर दृष्टिहीनता का समाधान निकाला जा सकता है. इस पूरी प्रक्रिया को थ्री डी बायो प्रिंटर के माध्यम से बताया गया है.

क्यों है जरुरी?

मानव शरीर में आंखों की बाहरी परत के रूप में कॉर्निया दृष्टि को फोकस करने में अहम भूमिका निभाता है. हालांकि विज्ञान जगत में यह एक बड़ी समस्या रही है कि प्रत्यारोपण के लिए कॉर्निया उपलब्ध नहीं हो पाता है. विश्वभर में लगभग एक करोड़ लोगों को कॉर्निया से संबद्ध दृष्टिहीनता दूर करने के लिए ऑपरेशन की जरूरत होती है.

आंखों से संबंधित संक्रामक रोग जैसे कि ट्रैकोमा के कारण लोगों को कॉर्निया के ऑपरेशन की जरूरत होती है. इसके अलावा जलने, जख्म, खरोंच या किसी बीमारी के चलते कॉर्निया के क्षतिग्रस्त होने के कारण करीब 50 लाख लोग पूरी तरह से दृष्टिहीनता के शिकार हो जाते हैं.

भारत में दृष्टिहीनता और खोज का महत्व

भारत में दृष्टिहीनता नियंत्रण राष्ट्रीय कार्यक्रम वर्ष 1976 में पूरी तरह से केंद्र प्रायोजित परियोजना के रूप में 2020 तक दृष्टिहीनों की संख्या 0.3 प्रतिशत करने के लक्ष्य से शुरू किया गया. वर्ष 2006-07 के एक सर्वेक्षण के अनुसार दृष्टिहीनता 2001-2002 के 1.1 से 2006-07 में 1 प्रतिशत रह गई है. इसे तहत लाभार्थी मोतियाबिंद, अपवर्तक त्रुटि, कॉर्निया अंधत्व जैसे अंधेपन के मुख्य कारणों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं तथा उसका इलाज करा सकते हैं.

3डी कॉर्निया की खोज भारत के लिए फ़िलहाल महंगी साबित हो सकती है लेकिन इसके फायदों से इंकार नहीं किया जा सकता. यदि भारत में सरकारी सहायता से इस तकनीक को लॉन्च किया जाता है तो लाखों लोगों को इसका फायदा हो सकता है.

 

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