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वर्ष 2100 तक बढ़ते समुद्री जल-स्तर पर प्रति वर्ष 14 ट्रिलियन डॉलर खर्च होंगे

समुद्री जल का बढ़ता हुआ स्तर वर्ष 2100 तक प्रतिवर्ष 14 ट्रिलियन डॉलर तक का हो सकता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि वैश्विक तापमान की बढ़ोतरी को 2 डिग्री सेल्सियस तक नहीं रोका गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे.

यूके नेशनल ओशियनोग्राफिक सेंटर (एनओसी) द्वारा जारी इस शोध पत्र के अनुसार समुद्री जल स्तर के बढ़ने से इस समस्या से बचाव के लिए वार्षिक 14 ट्रिलियन डॉलर खर्च किये जायेंगे. यह शोधपत्र ‘एनवायरनमेंट रिसर्च लेटर्स नामक पत्रिका में 3 जुलाई को प्रकाशित हुआ.

इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. स्वेतलाना जेव्रेजेवा ने कहा, “600 मिलियन से अधिक लोग 10 मीटर से भी कम ऊंचाई वाले तटीय क्षेत्रों में रहते हैं. पिघलती चट्टानों और बर्फीली चट्टानों पर मौजूद ग्रीष्म कालीन मौसम के कारण समुद्री जल स्तर बहुत तेजी से बढ़ रहा है. इसलिए ग्लोबल वार्मिंग के दुष्परिणामों में बढ़ता समुद्री जल स्तर सबसे अधिक महत्वपूर्ण है.”

अध्ययन से संबंधित मुख्य तथ्य


•    शोधकर्ताओं के अनुसार चीन जैसे उच्चतम-मध्यम आय वाले देशों में बाढ़ की लागत में सबसे ज्यादा वृद्धि देखी जाएगी.

•    शोधकर्ताओं ने बताया है कि उच्चतम आय वाले देशों को कम से कम भुगतना होगा क्योंकि इन देशों के पास अन्य देशों की तुलना में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर है.

•    उत्सर्जन परिदृश्य और सामाजिक-आर्थिक परिदृश्यों के लिए समुद्र स्तर के अनुमान भी दिये गये हैं.

•    21वीं सदी में वैश्विक तापमान 2 डिग्री सेल्सियस से कम एवं 1.5 डिग्री तक रखने के लिए किसी परिदृश्य के बारे में नहीं बताया गया है.

•    शोधकर्ताओं की टीम ने 1.5 से 2 डिग्री सेल्सियस के आधार पर समुद्री जलस्तर का अध्ययन किया है. इसमें वैश्विक एवं क्षेत्रीय समुद्री जल स्तर के बारे में बताया गया है.

•    इस अध्ययन के लिए विश्व बैंक की आय समूहों का उपयोग किया गया है तथा आंकड़ों के आधार पर अध्ययन कर के इस निष्कर्ष पर पहुंचा गया है.


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