भारत में मातृ मृत्यु दर में काफी कमी देखी गई: एसआरएस रिपोर्ट

सैम्पल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) ने मापा कि भारत में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) में गिरावट आई है. भारत में मातृ मृत्यु दर में काफी कमी देखी जा रही है जो देश के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है.

दक्षिणी राज्यों में प्रति एक लाख जन्म पर एमएमआर 77 से घटकर 72 पर आ गया है जबकि यह आंकड़ा अन्य राज्यों में 93 से घटकर 90 हो गया है. भारत में मातृ मृत्यु दर में साल 2013 से अब तक 26.9 प्रतिशत की कमी आई है.

एसआरएस रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएं

• पिछले सर्वेक्षण 2014-2016 की तुलना में एमएमआर में 6.15 प्रतिशत की कमी आई है.

• रिपोर्ट में कहा गया है कि यह उत्साहजनक है कि मातृ मृत्यु दर 2014-2016 के 130 से घटकर साल 2015-2017 में 122 रह गई है.

• एमएमआर में सबसे बड़ी गिरावट असम में दर्ज की गई थी जहां यह पहले की संख्या 188 से घटकर 175 हो गई है.

• मातृ मृत्यु दर को अच्छे तरीके से समझने हेतु खासतौर पर क्षेत्रीय आधार पर, सरकार ने राज्यों को सशक्त कार्य समूह (ईएजी), दक्षिण राज्यों और 'अन्य' में श्रेणीबद्ध किया है.

• केरल ने मातृ मृत्यु दर में गिरावट में पहला स्थान हासिल किया है. इसने एमएमआर में 46 से 42 तक की गिरावट दर्ज की है.

• उत्तराखंड राज्य ने देश के 19 बड़े राज्यों की सूची में 08वां स्थान हासिल किया है. जबकि पूर्व में उत्तराखंड 15वें स्थान पर था.

• इस रिपोर्ट में महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर था, जहां एमएमआर में 61 से 55 तक की गिरावट आई है. रिपोर्ट में तमिलनाडु तीसरे स्थान पर रहा, जहां एमएमआर में 66 से 63 तक गिरावट दर्ज की गई है.

• संयुक्त राष्ट्र ने साल 2030 तक एमएमआर को प्रति एक लाख जन्म पर 70 से कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया है.

मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) क्या है?

मातृ मृत्यु दर (एमएमआर): एक लाख जीवित जन्म पर होने वाली मातृ मृत्यु की संख्या मातृ मृत्यु दर कहलाती है. गर्भावस्था प्रसव दौरान या प्रसव पश्चात 42 दिन के भीतर गर्भावस्था के कारणों से होने वाली 15 से 49 वर्ष की महिला की मृत्यु को मातृ मृत्यु कहते हैं.

भारत में पहली रिपोर्ट मातृ मृत्यु दर पर अक्टूबर 2006 में जारी की गई थी. इसमें साल 1997 से साल 2003 के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया था. इसमें प्रचलन, कारण और खतरे को रेखांकित किया गया था.

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एमएमआर में गिरावट के कारण

सरकार ने सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए विभिन्न सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल शुरू की हैं. इनमें से कुछ पहलें- जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई), प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई), प्रधानमंत्री सुरक्षा मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए), पोशन अभियान हैं.

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