Saudi Oil Facility Attack: जानिए भारत पर क्या हो सकता है असर?

सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको के दो बड़े ठिकानों पर 14 सितम्बर 2019 को हुए ड्रोन हमले के बाद कंपनी ने वहां उत्पादन ठप कर दिया है. इसके कारण से सऊदी अरब की इस सबसे बड़ी तेल एवं गैस कंपनी के उत्पादन में 50 प्रतिशत तक की कमी आई है.

सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री के अनुसार इस हमले के कारण से कच्चे तेल का उत्पादन प्रतिदिन 57 लाख बैरल तक घट गया है. विश्लेषकों की राय है कि इससे विश्वभर में तेल के दाम पर असर होगा. सऊदी अरब वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है. सऊदी अरब के इन तेल ठिकानों पर हमले से काफ़ी नुक़सान हुआ है.

विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी अरब के प्लांट में तेल आपूर्ति सामान्य (Normal) होने में कई हफ्ते लग सकते हैं. इस हमले से लगभग 5 प्रतिशत ग्लोबल सप्लाई पर असर पड़ा है. कच्चे तेल की कीमतों में अगले एक हफ्ते में ही 15 से 20 डॉलर प्रति बैरल की बढ़त होने की संभावना है.

आरामको विश्व की सबसे बड़ी तेल कंपनी

आरामको विश्व की सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी है. अरामको पर हमले के बाद सऊदी अरब के अधिकारियों ने तेल सप्लाई में कटौती आने की बात कही है. विश्व भर में कच्चे तेल का प्रति दिन 10 करोड़ बैरल प्रति दिन का उत्पादन होता है, जिसका करीब 10 प्रतिशत हिस्सा सऊदी अरब में उत्पादित होता है.

कच्चा तेल हो सकता है महंगा

विश्व के प्रमुख तेल बाजार के सबसे बड़े भंडार पर हुए ड्रोन हमलों के कारण से निकट भविष्य में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है. इसका प्रभाव करीब-करीब पूरी दुनिया पर पड़ेगा. सबसे ज्यादा प्रभाव उन देशों पर पड़ेगा, जो सऊदी अरब से सीधे तेल आयात करते हैं. इस हमले की वजह से कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ेंगी. विश्लेषकों के अनुसार, अगर उत्पादन लंबे समय तक बंद रहा तो तेल संकट गहरा भी सकता है.

भारत पर क्या होगा असर?

भारत कच्चे तेल के मामले में विश्व का तीसरा सबसे बड़ आयातक (Importer) देश है. गौरतलब है कि भारत में कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए सऊदी अरब अहम स्रोत है. भारत के लिए सऊदी अरब कच्चे तेल और कुकिंग गैस का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ती मांग का असर भारत पर भी पड़ेगा.

कीमतों में वृद्धि के वजह से भारत के तेल आयात​ बिल के साथ-साथ राजकोषीय घाटे पर भी बहुत बुरा असर पड़ सकता है. भारत ने वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान अपने कच्चे तेल के आयात पर लगभग 111.9 अरब डॉलर खर्च किया था. कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के वजह से भारत में आर्थिक सुस्ती, वैश्विक मंदी का डर तथा व्यापार युद्ध (ट्रेड वॉर) को लेकर घरेलू बाजार में ग्राहकों पर बुरा असर पड़ सकता है.

सऊदी तेल संयत्र पर हमला चिंता का विषय

भारत के लिए सऊदी तेल संयत्रों पर हमला चिंता का विषय बन सकता है. सऊदी अरब की अरमाको के साथ भारत की अहम डील है और रिलायंस के भी बिजनस में 20 प्रतिशत तक की हिस्सेदारी है. इसके साथ ही अरमाको महाराष्ट्र में एक बड़ी रिफाइनरी में भी सहभागी है.

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