Single-use plastic ban: सिंगल यूज प्लास्टिक क्या है और इसे बैन क्यों किया जा रहा है?

केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने पेप्सी, कोका कोला समेत कई दर्जन कंपनियों से तीन दिन में पैकेजिंग की वैकल्पिक सामग्री का सुझाव देने का निर्देश दिया है. भारत में 2 अक्टूबर 2019 से सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा.

रामविलास पासवान ने पीने के पानी की प्लास्टिक बोतलों पर रोक लगाने के उपायों पर विचार करने हेतु संबंधित मंत्रालयों के अफसरों व निर्माता कंपनियों की बैठक बुलाई थी. उन्होंने कहा की पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने में प्लास्टिक की भूमिका सबसे ज्यादा है. इसके अतिरिक्त मानव तथा मवेशियों के स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक साबित हो रहा है.

इस बैठक में सभी निर्माताओं से कहा गया है कि वे अपने-अपने सुझाव लिखित तौर पर 11 सितंबर 2019 तक मंत्रालय के सचिव को सौंपें, जिसे कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाले अंतर मंत्रालयी समिति और प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा जाएगा.

जागरुक करने की सलाह

केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने प्लास्टिक के प्रभाव से होने वाली बीमारियों एवं पर्यावरण प्रदूषण के बारे में लोगों को जागरुक करने की सलाह दी है. उन्होंने कहा की रिसाइकिलिंग एक उपाय जरूर है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है. इसके उपयोग पर पाबंदी ही केवल एक मात्र कारगर उपाय है.

समिति का हुआ गठन

रामविलास पासवान ने 09 सितम्बर 2019 को बताया कि मंत्रिमंडल सचिव की अध्यक्षता में एक अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया गया. इस समिति को एक ही बार में या चरणबद्ध तरीके से सिंगल उपयोग वाले प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर गौर करने का आदेश दिया गया है.

देश को पूरी तरह से प्लास्टिक मुक्त बनाने की योजना

प्रधानमंत्री मोदी ने साल 2022 तक देश को पूरी तरह से प्लास्टिक मुक्त बनाने की योजना रखा है. इसकी शुरुआत 2 अक्टूबर 2019 से होगी. इस बैन से प्लास्टिक बैग, कप, प्लेट्स, छोटे बोतल और प्लास्टिक से बने दूसरे सामान का इस्तेमाल बंद हो जाएगा. पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस को दिए गए भाषण में लोगों और सरकारी एजेंसियों से देश को प्लास्टिक मुक्त बनाने की अपील की थी.

सिंगल-यूज प्लास्टिक क्या है?

सिंगल-यूज प्लास्टिक एक ऐसा प्लास्टिक जिसका उपयोग हम केवल एक बार करते हैं. एक इस्तेमाल करके फेंक दी जाने वाली प्लास्टिक ही सिंगल-यूज प्लास्टिक कहलाता है. हमलोग इसे डिस्पोजेबल प्‍लास्टिक भी कहते हैं.

हालांकि, इसकी रीसाइक्लिंग (recycling) की जा सकती है. इसका उपयोग हम अपने रोजमर्रा के काम में करते हैं.

बैन क्यों होने जा रहा है?

जलवायु परिवर्तन के कारण बिगड़ता पर्यावरण विश्व के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है. ऐसे में प्लास्टिक से पैदा होने वाले प्रदूषण को रोकना एक बहुत बड़ी समस्या बनकर उभरी है. प्रत्येक साल कई लाख टन प्लास्टिक उत्पादन (produce) हो रहा है, जो कि मिट्टी में नहीं घुलता-मिलता (Biodegradable) है. इसलिए विश्व भर के देश सिंगल-यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल को समाप्त करने हेतु कठोर रणनीति बना रहे हैं.

सिंगल यूज प्‍लास्टिक करीब 7.5 प्रतिशत की ही रीसाइक्लिंग हो पाती है. बाकी प्लास्टिक मिट्टी में मिल जाती है, जो पानी की सहायता से समुद्र में पहुंचता है और वहां के जीवों को काफी नुकसान पहुंचाता है. अधिकांश प्लास्टिक कुछ समय में टूटकर जहरीले रसायन भी छोड़ते हैं. ये रसायन पानी और खाद्य सामग्रियों के द्वारा हमारे शरीर में पहुंचते हैं और काफी नुकसान पहुंचाते हैं.

यह भी पढ़े: प्रधानमंत्री मोदी ‘राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण’ कार्यक्रम को लॉन्च करेंगे

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