FATF ने श्रीलंका को दी बड़ी राहत, ग्रे सूची से किया बाहर

वित्तीय कार्रवाई कार्यदल (एफएटीएफ) ने हाल ही में श्रीलंका को संदिग्ध सूची से बाहर कर दिया है. आंतकवाद के वित्तपोषण पर नजर रखने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन एफएटीएफ ने इस सूची से श्रीलंका से बाहर कर दिया है.

कोलंबो गजट ने 19 अक्टूबर 2019 को अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया और कहा कि श्रीलंका अब एफएटीएफ की निगरानी के अधीन नहीं होगा. आतंकवाद को फंडिंग तथा मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के वजह से श्रीलंका को साल 2016 में ग्रे लिस्ट में डाला गया था.

एफएटीएफ ने कहा कि श्रींलंका ने इसपर महत्वपूर्ण प्रगति की है. एफएटीएफ ने हाल ही में पेरिस में संपन्न हुई अपनी पांच दिवसीय बैठक के बाद कहा कि श्रीलंका ने रणनीतिक एएमएल तथा सीएफटी कमियों को दूर करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है.

पेरिस स्थित संगठन एफएटीएफ ने अक्टूबर 2016 में घोषणा की थी कि श्रीलंका आतंकी वित्तपोषण को लेकर उसके अंतरराष्ट्रीय सहयोग समीक्षा समूह (आईसीआरजी) की निगरानी में होगा, जो श्रीलंका में एएमएल या सीएफटी की प्रभावशीलता का आकलन करेगा.

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ):

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) एक अंतर-सरकारी संस्था है. यह संस्था साल 1989 में मनी लॉन्ड्रिंग तथा आतंकी फंडिंग को रोकने समेत अन्य संबंधित खतरों का मुकाबला करने हेतु स्थापित किया गया है. एफएटीएफ का वर्ष 2001 में इसका कार्यक्षेत्र विस्तारित किया गया था. इस विस्तार में आतंकवाद को धन मुहैया कराने के विरुद्ध नीतियाँ बनाना भी इसके कार्यक्षेत्र में शामिल कर लिया गया था.

एफएटीएफ का सचिवालय पेरिस स्थित आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन के मुख्यालय में है. एफएटीएफ वित्त विषय पर कानूनी, विनियामक एवं परिचालन उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन को बढ़ावा देता है. इस संस्था का कार्यक्षेत्र विस्तारित किया गया है, तथा आतंकवाद को धन मुहैया कराने के विरुद्ध नीतियाँ बनाना भी इस संस्था के कार्यक्षेत्र में सम्मिलित कर लिया गया.

यह भी पढ़ें:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘ब्रिजिटल नेशन’ पुस्तक का विमोचन किया

ग्रे सूची क्या है?

उन देशों को ग्रे सूची में डाला जाता है, जो काले धन को वैध बनाने तथा आतंकी फंडिंग के लिए जाने जाते है. ग्रे सूची में डाले गए देशों के ब्लैक लिस्ट होने का भी खतरा बना रहता है. ग्रे सूची में डालने के बाद उस देश को अंतरराष्ट्रीय संस्थानों तथा देशों से ऋण प्राप्त करने में बहुत बड़ी समस्या आती है. ग्रे सूची में डालने के बाद देश को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कमी आती है और अर्थव्यवस्था भी कमजोर होते जाती है.

यह भी पढ़ें:भारत और फिलीपींस ने चार समझौते पर हस्ताक्षर किये

यह भी पढ़ें:निजाम फंड केस: ब्रिटेन की कोर्ट ने भारत के पक्ष में फैसला, निजाम के धन को लेकर पाकिस्तान का दावा खारिज

करेंट अफेयर्स ऐप से करें कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी,अभी डाउनलोड करें| Android|IOS

Related Categories

Popular

View More