शाहीन बाग मामला: सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों से वार्ता के लिए बनाई कमेटी

सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों से बात करने के लिए मध्यस्थों की नियुक्ति की है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उनसे (प्रदर्शनकारियों) बात करना जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि विरोध का कारण जो भी हो, सार्वजनिक सड़क को अवरुद्ध करना अच्छा नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग में नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों का पक्ष जानने हेतु दो वार्ताकार नियुक्त किए हैं. कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े तथा साधना रामचंद्रन के नाम प्रदर्शनकारियों से बात करने हेतु वार्ताकार के रूप में नियुक्त किए हैं. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 फरवरी 2020 की तारीख तय कर दी है.

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

• सुप्रीम कोर्ट ने साफ़-साफ़ कहा कि लोगों को विरोध करने का मौलिक अधिकार है लेकिन जो चीज हमें परेशान कर रही है वह सड़कों को बाधित करना है.

• सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा कि लोकतंत्र, विचार व्यक्त करने का अधिकार देता है, लेकिन इसके लिए रेखाएं और सीमाएं हैं.

• सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर सभी सड़क बंद करने लगे तो परेशानी खड़ी हो जाएगी. यातायात नहीं बंद होना चाहिए. यह मामला जनजीवन को ठप करने की समस्या से जुड़ा है.

• सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शाहीन बाग में लंबे समय से प्रदर्शन चल रहा है लेकिन यह दूसरे के लिए असुविधा नहीं पैदा कर सकता. इसके साथ ही पीठ ने कहा कि वे दूसरे पक्ष को सुने बगैर कोई आदेश जारी नहीं करेगी.

शाहीन बाग: मध्यस्थ

सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन को प्रदर्शनकारियों से बात करने के लिए मध्यस्थ नियुक्त किया है. उन्हें प्रदर्शनकारियों को अपने प्रदर्शन को कहीं और ले जाने हेतु मनाने की जिम्मेदारी दी गई है. कोर्ट ने इसके लिए उन्हें एक हफ्ते का समय दिया है. शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों ने मध्यस्थता के विकल्प को स्वीकार कर लिया है.

पृष्ठभूमि

दिल्ली के शाहीन बाग में दो महीने से ज्यादा समय से लगातार प्रदर्शन जारी है. धरना दे रहे लोग नागरिकता कानून (सीएए) और भारतीय राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का विरोध कर रहे हैं. नरेंद्र मोदी सरकार ने 12 दिसंबर 2019 को संसद से सीएए  पास कराया था. प्रदर्शनकारी सीएए और एनआरसी को खत्म करने की मांग कर रहे हैं.

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