Advertisement

टॉप कैबिनेट मंजूरी: 26 अप्रैल 2018

मंत्रिमंडल ने पारम्परिक चिकित्सा पद्धति और होम्योपैथी के क्षेत्र में भारत और साउ तोमे के बीच समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने पारम्परिक चिकित्सा पद्धति और होम्योपैथी के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और साउ तोमे तथा प्रिंसीपे के बीच समझौता ज्ञापन को पूर्व प्रभाव से अपनी मंजूरी दे दी. समझौता ज्ञापन पर मार्च 2018 में हस्ताक्षर किए गए थे.

समझौता ज्ञापन से पारम्परिक चिकित्सा पद्धति के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग बढ़ेगा. यह साझी सांस्कृतिक विरासत को देखते हुए दोनों देशों के लिए काफी लाभकारी होगा. दोनों देशों द्वारा की जाने वाली पहलें हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन की शर्तों के अनुसार होंगी और समझौता ज्ञापन के संचालन तक निरंतर प्रक्रिया होगी.

 

केन्द्रीय मंत्रिमंडल को भारत और विश्व स्वास्थ्य संगठन के बीच समझौता ज्ञापन से अवगत कराया गया

केन्द्रीय मंत्रिमंडल को भारत और विश्व स्वास्थ्य संगठन के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन से अवगत कराया गया. विश्व स्वास्थ्य संगठन का प्रतिनिधित्व भारत में कंट्री कार्यालय के माध्यम से कार्य कर रहे दक्षिण पूर्व एशिया के क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा किया गया. समझौता ज्ञापन पर नई दिल्ली में 13 मार्च 2018 को हस्ताक्षर किए गए थे.

द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन भारत और विश्व स्वास्थ्य संगठन के बीच सहयोग को प्रोत्साहन देगा. इससे भारत के लोगों की सार्वजनिक स्वास्थ्य की स्थिति सुधारने में सहायता मिलेगी.

 

कैबिनेट ने जापान और दक्षिण कोरिया को लौह अयस्‍क की आपूर्ति के लिए दीर्घावधि समझौतों को मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एमएमटीसी लिमिटेड के जरिये जापान की इस्‍पात मिलों (जेएसएम) और दक्षिण कोरिया की पोस्‍को को 64 प्रतिशत से ज्‍यादा लौह सामग्री की किस्‍म के लौह अयस्‍क (गोला एवं बारीक) की आपूर्ति पांच और वर्षों तक करने के लिए दीर्घावधि समझौतों (एलटीए) के नवीकरण को मंजूरी दी है.

वर्तमान एलटीए 31 मार्च 2018 तक वैध था. जापान की इस्‍पात मिलों और दक्षिण कोरिया की पोस्‍को के साथ नवीनीकृत एलटीए 01 अप्रैल 2018 से लेकर 31 मार्च 2023 तक मान्‍य होंगे. इन एलटीए के तहत एमएमटीसी के जरिये जेएसएम और दक्षिण कोरिया की पोस्‍को को आपूर्ति के लिए प्रस्‍तावित लौह अयस्‍क 64 प्रतिशत से ज्‍यादा लौह सामग्री वाली किस्‍म के होंगे.

 

कैबिनेट ने ब्रिक्‍स देशों की चिकित्‍सा नियामक एजेंसियों के बीच एमओयू को मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मानव उपयोग के लिए चिकित्‍सीय उत्‍पादों के नियमन के क्षेत्र में सहयोग हेतु ब्रिक्‍स देशों की चिकित्‍सा नियामक एजेंसियों के बीच सहमति‍ पत्र (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर किए जाने को अपनी मंजूरी दे दी है.

उपर्युक्‍त एमओयू से संबंधित पक्षों के बीच नियामकीय पहलुओं के बारे में बेहतर समझ विकसित करने में आसानी होगी और इसके साथ ही भारत से ब्रिक्‍स देशों को चिकित्‍सीय उत्‍पादों के निर्यात में मदद मिल सकती है.

 

मंत्रिमंडल ने 2018-19 मौसम के लिए कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्यों को मंजूरी दी

मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने 2018-19 मौसम के लिए कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि करने की अपनी स्वीकृति दे दी.

2018-19 मौसम के लिए शुद्ध औसत क्वालिटी (एफएक्यू) के कच्चे जूट का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 3,700 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है. यह मूल्य 2017-18 मौसम में प्रति क्विंटल 3,500 रुपये था. भारतीय जूट निगम जूट उत्पादक राज्यों में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूल्य समर्थन संचालन के लिए केन्द्रीय नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता रहेगा.

 

कैबिनेट ने औषधीय पौधों के क्षेत्र में सहयोग हेतु भारत एवं साओ तोमे और प्रिन्सिपी के बीच एमओयू को स्‍वीकृति दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने औषधीय पौधों के क्षेत्र में सहयोग हेतु भारत एवं साओ तोमे और प्रिन्सिपी के बीच सहमति पत्र (एमओयू) के लिए अपनी पूर्वव्‍यापी स्‍वीकृति दे दी है. इस एमओयू पर 14 मार्च 2018 को हस्‍ताक्षर किए गए थे.

भारत जैव विविधता की दृष्टि से दुनियां के सर्वाधिक समृद्ध देशों में से एक है. फूलदार पौधों की 17000-18000 प्रजातियों में से 7000 से भी अधिक प्रजातियों का औषधीय उपयोग चिकित्‍सा की लोक एवं प्रलेखित प्रणालियों जैसे कि आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (चिकित्‍सा की आयुष प्रणाली) में है. औषधीय पौधे न केवल पारंपरिक चिकित्‍सा और हर्बल उद्योग के लिए एक प्रमुख संसाधन आधार हैं, बल्कि ये भारत की आबादी के एक बड़े वर्ग को आजीविका एवं स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी सुरक्षा भी सुलभ कराते हैं.

 
Advertisement

Related Categories

Advertisement