टॉप कैबिनेट मंजूरी: 26 सितंबर 2018

मंत्रिमंडल ने आईसीएआई तथा केन्‍या के इंस्‍टीट्यूट ऑफ सर्टिफायर्ड पब्लिक एकाउंटेंट्स के बीच समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी

•   केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इंस्‍टीट्यूट ऑफ चार्टेड एकाउंटेंट् ऑफ इंडिया (आईसीएआई) तथा केन्‍या के इंस्‍टीट्यूट ऑफ सर्टिफायर्ड पब्लिक एकाउंटेंट्स के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर को अपनी मंजूरी दे दी है.

•   इससे संयुक्‍त शोध, गुणवत्‍ता समर्थन, क्षमता सृजन, प्रशिक्षु एकाउंटेंट आदान-प्रदान कार्यक्रम के माध्‍यम से ज्ञान साझा करने के क्षेत्र में परस्‍पर सहयोग में मदद मिलेगी और निरंतर पेशेवर विकास (सीपीडी) पाठ्यक्रमों, कार्यशालाओं तथा सम्‍मेलनों के आयोजन में सहायता मिलेगी.

•   आईसीएआई तथा आईसीपीएके दोनों संस्‍थानों के कर्मियों को कार्यक्रम के अनुसार सहमति वाले औपचारिक कार्य प्‍लेसमेंट के जरिए अवसर प्रदान करेंगे.

•   जागरूकता बढ़ाने तथा आईसीएआई/आईसीपीएके की रणनीतिक साझेदारी की गतिविधियों को संयुक्‍त रूप से प्रोत्‍साहन दिया जाएगा और समझौता ज्ञापन में दिए गए क्षेत्रों में सहयोग को प्रोत्‍साहित किया जाएगा.

 

मंडिमंडल ने नीति आयोग और रूसी संघ के आर्थिक विकास मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी

•   केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सामाजिक, आर्थिक, औद्योगिक तथा क्षेत्रीय विकास कार्यक्रमों के क्षेत्र में नीति आयोग और रूसी संघ के आर्थिक विकास मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर को अपनी मंजूरी दे दी है.

•   इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्‍य सामाजिक, आर्थिक, औद्योगिक तथा क्षेत्रीय विकास की रणनीतियों और कार्यक्रमों को बनाने तथा लागू करने में सहयोग की संभावना तलाशना है.

•   इसमें एक दूसरे की शक्तियों, बाजार, प्रौद्योगिकी, नीतियों आदि को समझने के लिए ढांचा और अनुकूल वातावरण बनाने का प्रावधान है.

 

मंत्रिमंडल ने राष्‍ट्रीय डिजिटल संचार नीति-2018 को मंजूरी दी

•   केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्‍ट्रीय डिजिटल संचार नीति – 2018 (एनडीसीपी-2018) तथा दूरसंचार आयोग को नया नाम ‘डिजिटल संचार आयोग’ देने की स्‍वीकृति दे दी है.

•   एनडीसीपी-2018 का उद्देश्‍य भारत को डिजिटल रूप से सशक्‍त अर्थव्‍यवस्‍था और समाज बनाना है. यह कार्य सर्वव्‍यापी, लचीला और किफायती डिजिटल संचार अवसंरचना तथा सेवाओं की स्‍थापना से नागरिकों तथा उद्यमों की सूचना और संचार आवश्‍यकताओं को पूरा करके किया जाएगा.

 

मंत्रिमंडल ने पटना हवाई अड्डे पर नया घरेलू टर्मिनल भवन तथा संबंधित अवसंरचना निर्माण की स्‍वीकृत दी

•   मंत्रिमंडलीय आर्थिक समिति ने पटना हवाई अड्डे पर 1,216.90 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत से नया घरेलू टर्मिनल भवन तथा संबंधित अवसंरचना के निर्माण को अपनी स्‍वीकृति दे दी है.

•   नया टर्मिनल भवन बनने के बाद हवाई अड्डे की यात्री क्षमता बढ़कर प्रतिवर्ष 4.5 मिलियन हो जाएगी. अभी हवाई अड्डे की यात्री क्षमता प्रतिवर्ष 0.7 मिलियन है.

•   नया टर्मिनल भवन 65,155 वर्ग मीटर का होगा जिसमें 18,650 वर्गमीटर क्षेत्र भूतल होगा. इस भवन को विश्‍व स्‍तरीय यात्रा सुविधाओं से लैस किया जाएगा.

•   नया टर्मिनल भवन बनने से पटना क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, जिससे अतिरिक्‍त रोजगार सृजन होगा. इस परियोजना के साथ बिहार के लोगों की आकांक्षाएं पूरी हुई हैं.

•   यह परियोजना प्रधानमंत्री द्वारा बिहार के लिए घोषित पैकेज का अंग है. बिहार का पटना हवाई अड्डा पूर्वी क्षेत्र के प्रमुख हवाई अड्डों में एक है. हवाई अड्डे का वर्तमान टर्मिनल भवन दो मंजिला पुराना ढांचा है और इसका उपयोग क्षमता से चार गुणा अधिक किया जा रहा है.

 

मंत्रिमंडल ने जम्मू और कश्मीर तथा बिहार की सरकारों को हस्तांतरित (विनिवेश) करने की स्वीकृति दी

•   मंत्रिमंडलीय आर्थिक समिति ने विनिवेश नीति का अनुसरण करते हुए आईटीसी की संपत्तियों/इकाइयों/ संयुक्त उद्यमों का आगे विनिवेश की मंजूरी दे दी है. यह विनिवेश होटल गुलमर्ग अशोक, गुलमर्ग तथा होटल पाटलिपुत्र अशोक, पटना की अधूरी परियोजनाओं को क्रमशः जम्मू और कश्मीर तथा बिहार की सरकारों को हस्तांतरित (विनिवेश) करके किया जाएगा.

•   भारत सरकार की विनिवेश नीति के अनुसार भारतीय पर्यटन विकास निगम लिमिटेड (आईटीडीसी) के होटलों/संपत्तियों/इकाईयों/संयुक्‍त उद्यमों को पट्टे/उपपट्टे पर राज्‍य सरकारों को देना का निर्णय लिया गया था.

•   पट्टे/उपपट्टे के प्रस्‍ताव पर राज्‍य सरकारों की सहमति न होने की स्थिति में संपत्तियों को अधिकारिक अंकित मूल्‍य पर राज्‍य सरकारों को वापस देने के प्रस्‍ताव को भी स्‍वीकृत किया गया था. यह नीति इस बात को ध्‍यान में रखकर बनाई गई थी कि पेशेवर तरीके से होटलों को चलाना और उनका प्रबंधन करना सरकार या उसकी कंपनियों का काम नहीं है.

 

मंत्रिमंडल ने देश में आवश्‍यकता से अधिक चीनी उत्‍पादन से निपटने के लिए विस्‍तृत नीति को मंजूरी दी

•   मंत्रिमंडलीय आर्थिक समिति ने आगामी चीनी सीजन 2018-19 में अधिक चीनी उत्‍पादन की संभावना को देखते हुए लागत संतुलन बनाकर चीनी क्षेत्र को समर्थन देने के लिए 5500 करोड़ रूपये की कुल सहायता की स्‍वीकृति दी है.

•   इस स्‍वीकृति से देश से चीनी के निर्यात को प्रोत्‍साहन मिलेगा और चीनी उद्योग को किसानों की बकाया गन्‍ना राशि का भुगतान करने में मदद मिलेगी.

•   चीनी सत्र 2018-19 में निर्यात बढ़ाने के लिए आंतरिक परिवहन, ढुलाई, हैंडलिंग तथा अन्‍य शुल्‍कों पर आय का खर्च वहन करके चीनी मिलों को सहायता प्रदान की जाएगी.    

•   किसानों की बकाया गन्‍ना राशि चुकाने में चीनी मिलों की सहायता के लिए सरकार ने चीनी मिलों को चीनी सत्र 2018-19 में 13.88 रूपये प्रति क्विंटल पेरे हुए गन्‍ने की दर से वित्‍तीय सहायता दी का निर्णय लिया है, ताकि गन्‍ने की लागत का समायोजन हो सके.

•   किसानों के गन्‍ने की बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए दोनों प्रकार की सहायता राशि चीनी मिलों की ओर से सीधे किसानों के खातों में भेज दी जाएगी.

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