टॉप हिन्दी करेंट अफ़ेयर्स: 11 नवंबर 2019

टॉप हिन्दी करेंट अफ़ेयर्स, 11 नवंबर 2019 के अंतर्गत आज के शीर्ष करेंट अफ़ेयर्स को शामिल किया गया है जिसमें मुख्य रूप से-मातृ मृत्यु दर और राष्ट्रीय शिक्षा दिवस आदि शामिल हैं.

भारत में मातृ मृत्यु दर में काफी कमी देखी गई: एसआरएस रिपोर्ट

भारत में मातृ मृत्यु दर में कमी देखी जा रही है जो देश के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है. दक्षिणी राज्यों में प्रति एक लाख जन्म पर एमएमआर 77 से घटकर 72 पर आ गया है जबकि यह आंकड़ा अन्य राज्यों में 93 से घटकर 90 हो गया है.

संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2030 तक एमएमआर को प्रति एक लाख जन्म पर 70 से कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया है. मातृ मृत्यु दर पर भारत में पहली रिपोर्ट अक्टूबर 2006 में जारी की गई थी. इसमें साल 1997 से साल 2003 के आंकड़ों का उपयोग किया गया था.

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 2019: जानिए इसके बारे में सब कुछ

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस स्वतंत्रता सेनानी एवं भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती के अवसर मनाया जाता है. उनका जन्म 11 नवंबर 1888 को हुआ था. शिक्षा दिवस के मौके पर भारत शिक्षा के क्षेत्र में अबुल कलाम कलाम द्वारा किए गए कामों को याद करता है.

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद एक प्रसिद्ध भारतीय मुस्लिम विद्वान थे. वे कवि, लेखक, पत्रकार तथा भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे. उन्होंने बचपन से शिक्षा को अपने जीवन का मुख्य श्रेय बनाया था. मौलाना अबुल कलाम आज़ाद भारत के पहले शिक्षा मंत्री थे.

अयोध्या विवाद: ASI के प्रमाण क्या हैं, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने फैसले का आधार बनाया?

सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने सर्वसम्मति से कहा कि मंदिर को तोड़ने और मस्जिद बनाने के बारे में कोई पुख्ता सबूत नहीं है. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने फैसला सुनाया कि विवादित जमीन राम जन्मभूमि न्यास को दी गई है.

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देश पर जांच के लिए विवादित स्थल की खुदाई की. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर साल 2003 में विवादित स्थल पर कराई गई खोदाई में मिले भग्नावशेषों से मंदिर के दावे को बल मिला था.

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का निधन

टीएन शेषन भारत में चुनाव नियमों को सख्ती से लागू करवाने हेतु मशहूर थे. टीएन शेषन को उनके कड़े रुख के लिए भी जाना जाता है. वे भारत के 10वें मुख्य चुनाव आयुक्त थे. उन्होंने इस पद पर 12 दिसंबर 1990 से 11 दिसंबर 1996 तक रहे.

वे अपने सख्त रवैये के लिए जाने जाते थे. उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान चुनाव आयोग का चेहरा बदल दिया. उनको चुनाव में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ावा देने हेतु याद किया जाता है. उन्हें साल 1996 में रैमन मैग्सेसे अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था.

Related Categories

Popular

View More