टॉप हिन्दी करेंट अफ़ेयर्स: 17 सितम्बर 2020

टॉप हिन्दी करेंट अफ़ेयर्स, 17 सितम्बर 2020 के अंतर्गत आज के शीर्ष करेंट अफ़ेयर्स को शामिल किया गया है जिसमें मुख्य रूप से भारतीय रिज़र्व बैंक और कोरोना वायरस आदि शामिल हैं.

लोकसभा में बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक 2020 पारित हुआ

सहकारी बैंकों का विनियमन 1965 से ही भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के पास है. सहकारी बैंकों को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के दायरे में लाने के लिए बैंकिंग विनियमन कानून में संशोधन के जरिये सरकार का लक्ष्य इनके कामकाज में सुधार लाना है.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जून 2020 में एक अध्यादेश के जरिये सहकारी बैंकों को रिजर्व बैंक के नियंत्रण में लाने की मंजूरी दी थी. साथ ही वाणिज्यिक बैंकों पर लागू होने वाले प्रावधानों को सहकारी बैंकों पर भी प्रभावी कर दिया गया था. इससे सहकारी बैंकों में अपना पैसा जमा करने वाले आम लोगों के हितों की रक्षा होगी.

 

लोकसभा में सांसदों के वेतन में 30% की कटौती करने के बिल को मिली मंजूरी

इस विधेयक को 14 सितंबर, 2020 को निचले सदन में पेश किया गया था. भारत सरकार ने इस महामारी के मद्देनजर वर्ष 2020-21 और वर्ष 2021-22 के लिए संसद सदस्यों के स्थानीय क्षेत्र विकास योजना कोष के अस्थायी निलंबन के लिए भी अपना अनुमोदन दिया था.

इस सरकारी योजना के तहत, दोनों सदनों के सदस्य हर साल 5 करोड़ रुपये के खर्च से जुड़े विकास कार्यक्रम की सिफारिश कर सकते हैं. लोकसभा में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने यह मांग रखी थी कि इस फंड को बहाल किया जाए क्योंकि उन्होंने सांसदों के वेतन में कटौती के सरकार के फैसले का समर्थन किया है.

 

आयुर्वेद शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान बिल-2020 राज्यसभा में पारित

इस विधेयक के पास होने से जामनगर स्थित आयुर्वेद की इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट टीचिंग एंड रिसर्च, गुलाबकुनर्वबा आयुर्वेद महाविद्यालय और इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद फार्मास्युटिकल साइंसेस को मिलाकर इसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा मिला है. इस विधेयक में तीन संस्थानों का विलय करने का प्रस्ताव है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने राज्यसभा में आयुर्वेद शिक्षण और अनुसंधान संस्थान विधेयक पर बोलते हुए कहा कि यह बिना किसी पूर्वाग्रह के चुना गया है. इसके अतिरिक्त सबसे खास बात यह है कि यह साल 1956 में सरकार द्वारा बनाई गई सबसे पुरानी आयुर्वेद संस्था है.

 

प्रधानमंत्री मोदी 18 सितंबर को करेंगे कोसी महासेतु का उद्घाटन

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से जारी एक बयान में कहा गया कि वीडियो कॉन्फ्रेंस से होने वाले कोसी रेल महासेतु का उद्घाटन बिहार के इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण होगा क्योंकि यह इस क्षेत्र को पूर्वोत्तर भारत के राज्यों से जोड़ेगा. प्रधानमंत्री ने पिछले कुछ दिनों में बिहार में दर्जन भर से अधिक परियोजनाओं का सौगात दिया है.

सरायगढ़-निर्मली के बीच कोसी नदी पर रेल महासेतु का शिलान्यास तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था. इसे साल 2003-04 में 323.41 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत किया गया था. लेकिन समय गुजरने के साथ ही इस परियोजना पर 516 करोड़ रुपये खर्च हुए.

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