संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा का चौथा सत्र केन्या के नैरोबी में संपन्न

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा का चौथा सत्र (UNEA-4) हाल ही में केन्या के नैरोबी में संपन्न हुआ. इस सत्र का उद्देश्य पर्यावरण से संबंधित वैश्विक समस्याओं के निदान संबंधी उपायों पर चर्चा करना था.

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा के चौथे सत्र का विषय था - “पर्यावरण की चुनौतियों तथा सतत उत्पादन व खपत के लिए नवोन्मेषी समाधान” (Innovative Solutions for Environmental Challenges and Sustainable Consumption and Production).

UNEA-4 के प्रमुख तथ्य

•    इस सत्र में आयोजित सभा में सदस्य देश वर्ष 2030 तक समान लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहमत हुए. सदस्य देशों ने कहा कि वे सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए विकास के नए मॉडल को अपनाएंगे.

•    सभी सदस्य देशों ने सहमति से 2030 तक एक बार उपयोग होने वाले प्लास्टिक उत्पादों जैसे प्लास्टिक के चाय के कप कप, पानी की बोतल और प्लास्टिक की थैलियां आदि का देश में उपयोग कम करने पर भी सहमति व्यक्त की.

•    संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के इस कार्यक्रम के दौरान (UNEP) वैश्विक पर्यावरण आउटलुक रिपोर्ट का छठा संस्करण भी जारी किया गया.

UNEA-4 में भारत

पहली बार भारत ने चौथे संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा (यूएनईए) में दो प्रमुख पर्यावरण मुद्दों, एकल-उपयोग वाली प्लास्टिक का कम से कम उपयोग और सतत नाइट्रोजन प्रबंधन पर आधारित दो प्रस्तावों की अगुवाई की. यह सभा 11 से 15 मार्च 2019 तक नैरोबी में आयोजित की गई थी. सभा ने सर्वसम्मति से दोनों प्रस्तावों पर स्वीकृति दी.

भारत ने यूएनईए के एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया था. इस सत्र का विषय था- वैश्विक साझेदारीः संसाधन दक्षता और सतत हरित अर्थव्यवस्था के लिए उपाय. इस आयोजन में सदस्य देशों, सामाजिक संगठनों, निजी क्षेत्रों के संगठनों तथा वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था. पैनल परिचर्चा में जर्मनी, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका के राजनयिकों तथा अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय  संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था. हरित अर्थव्यवस्था की ओर आगे बढ़ने के लिए संसधानों के बेहतर उपयोग और द्वतीयक कच्चे माल का उपयोग महत्वपूर्ण है.


भारतीय प्रस्तावों का महत्व

•    पहला, विश्व स्तर पर नाइट्रोजन उपयोग में दक्षता का अभाव है.

•    परिणामस्वरूप प्रतिक्रियाशील नाइट्रोजन प्रदूषण करता है जो मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण प्राणाली और सेवाओं के लिए खतरा है.

•    यह जलवायु परिवर्तन और ओजोन स्तर की कमी में भी योगदान देता है.

•    दूसरा, विश्व स्तर पर प्लास्टिक उत्पादन के एक छोटे हिस्से को ही फिर से प्रयोग में लाये जाने लायक बनाया जाता है. उत्पादित प्लास्टिक का अधिकांश भाग पर्यावरण और जलीय जैव –विविधता को नुकसान पहुँचाता है.

•    अतः दोनों वैश्विक चुनौतियां हैं. भारत के ये दोनों प्रस्ताव इस समस्या के समाधान तथा विश्व समुदाय का ध्यान आकर्षित करने की दिशा में पहला कदम है.

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा के बारे में जानकारी


•    संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा (UNEA) संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम का प्रशासनिक निकाय है.

•    पर्यावरण के संदर्भ में निर्णय लेने वाली विश्व की सर्वोच्च संस्था संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा है.

•    यह दुनिया के सामने आने वाली महत्त्वपूर्ण पर्यावरणीय चुनौतियों को संबोधित करती है.

•    यह पर्यावरणीय सभा वैश्विक पर्यावरण नीतियों हेतु प्राथमिकताएँ निर्धारित करने और अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण कानून विकसित करने के लिये हर दो वर्ष में एक बार आयोजित की जाती है.

•    सतत् विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के दौरान संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा का गठन जून 2012 में किया गया था.


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