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केंद्र सरकार ने मॉडल अनुबंध फार्मिंग एक्ट-2018 जारी किया

केन्द्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने 22 मई 2018 को ‘कृषि उत्पाद और पशुधन अनुबंध खेती एवं सेवाएं (प्रोत्साहन एवं सहूलियत) अधिनियम 2018’ का अंतिम मॉडल जारी किया.

मॉडल अनुबंध फार्मिंग एक्ट तैयार करने के पीछे मुख्य उद्देश्य बेहतर मूल्य प्राप्ति के लिए किसानों को थोक खरीददारों के साथ एकीकृत करना है. इस मॉडल एक्ट के तहत अनुबंध खेती (कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग) के लिये एक विनियामक और नीतिगत ढाँचा तैयार करने की व्यवस्था की गई है.

मॉडल अनुबंध फार्मिंग एक्ट-2018 से लाभ

 

  • कृषि उत्पाद और पशुधन अनुबंध खेती एवं सेवाएं (प्रोत्साहन एवं सहूलियत) अधिनियम 2018 नामक कानून के इस मसौदे में राज्यों के कृषि उत्पादन विपणन समिति (एपीएमसी) अधिनियम के दायरे से बाहर रखने को कहा गया है.
  • इससे खरीदारों को उनकी लेन-देन लागत पर पांच से 10 फीसदी की बचत करने में मदद मिलेगी.
  • मॉडल अनुबंध कानून की अन्य प्रमुख विशेषताओं में ऑनलाइन पंजीकरण के लिए जिला/ब्लॉक/तालुका स्तर पर एक समिति या अधिकारी नियुक्त करना तथा प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए ठेके का रिकॉर्ड रखना शामिल है.
  • इसका उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को उत्पादन और उत्पादन के बाद की गतिविधियों में अर्थव्यवस्था की तमाम गतिविधियों से लाभ उठाने के लिए किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) और किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीसी) को बढ़ावा देना है.

 

 

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अनुबंध खेती (फार्मिंग) क्या है?

•    अनुबंध खेती के तहत, खरीदार और उत्पादक के बीच हुए फसल-पूर्व समझौते के आधार पर कृषि उत्पादन (पशुधन और मुर्गी पालन सहित) किया जाता है.

•    इसमें खरीददार अर्थात् खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ और निर्यातक हैं तथा उत्पादक, किसान या किसान संगठन हैं.

•    इसका लाभ यह होता है कि अनुबंध में वर्णित शर्तों एवं प्रावधानों के अनुसार, उत्पादक द्वारा एक विशिष्ट कीमत पर कृषि उत्पादों को भविष्य में कभी भी खरीदार को बेचा जा सकता है.

•    अनुबंध खेती के तहत न केवल उत्पादक बाज़ार मूल्य और मांग में उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम कर सकने में सक्षम होते है, बल्कि खरीदार भी गुणवत्तायुक्त उत्पादन की अनुपलब्धता के जोखिम को कम कर सकने की स्थिति में होते हैं.

•    इस मॉडल एक्ट में वर्णित प्रावधानों के अनुसार, अनुबंध समझौते के तहत उत्पादक इनपुट (जैसे प्रौद्योगिकी, पूर्व-फसल और बाद की फसल के बुनियादी ढाँचे के रुप में) के माध्यम से उत्पादन में सुधार के लिये खरीदार से समर्थन प्राप्त कर सकता है.

•    इस अनुबंध में यह वर्णित किया गया है कि उत्पादन में सुधार हेतु समर्थन देते समय खरीदार उत्पादक की भूमि पर किसी भी प्रकार की स्थायी संरचना का निर्माण नहीं कर सकता है.

•    यह भी स्पष्ट किया गया है कि उत्पादक के भूमिगत अधिकार या भूमि के स्वामित्व के अधिकार को स्थानांतरित नहीं किया जा सकता है.

एपीएमसी के दायरे से बाहर

इस अधिनियम के अंतर्गत, अनुबंध कृषि करते समय उसे राज्य एपीएमसी के दायरे से बाहर किया गया है. इसका लाभ यह है कि अब खरीदार को अनुबंध खेती करने के लिये एपीएमसी हेतु मार्केट फीस और कमीशन शुल्क का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं रह होगी. इसके अलावा, मॉडल एक्ट के क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिये अधिनियम के अंतर्गत राज्य स्तर के अनुबंध खेती (संवर्द्धन और सुविधा) प्राधिकरण स्थापित करने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश भी प्रदान किये गए हैं.


कृषि उत्पाद विपणन समिति (APMC)

•    अभी तक कुछ राज्यों में अनुबंध खेती के लिये कृषि उत्पाद विपणन समिति (APMC) के द्वारा पंजीकरण किया जाना आवश्यक होता है.

•    कृषि के लिए अनुबंध समझौतों को एपीएमसी के साथ पंजीकृत किया जाता है. एपीएमसी इन अनुबंधों के दौरान होने वाले विवादों को हल करने का काम करती है.

•    यदि अनुबंध खेती की जा रही है तो उसके लिए एपीएमसी को बाज़ार के अनुसार तय शुल्क दिया जाता है.

•    राज्यों को अनुबंध आधारित खेती के लिए एपीएमसी अधिनियम, 2003 के तहत अनुबंध खेती से संबंधित कानूनों को लागू करने के अधिकार दिए जाते हैं.

 
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