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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एचआईवी/एड्स से पीडि़त लोगों के लिए वायरल लोड टेस्ट का शुभारंभ किया

केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने 26 फरवरी 2018 को ‘एचआईवी/एड्स (पीएलएचआईवी) से पीडि़त लोगों के लिए वायरल लोड टेस्‍ट’ का शुभारंभ किया.

वायरल लोड टेस्‍ट एचआईवी से पीडि़त लोगों के इलाज एवं निगरानी की दिशा में एक बड़ा कदम है.

एचआईवी/एड्स से पीडि़त लोगों के लिए वायरल लोड टेस्‍ट:

  • इस पहल से देश में इलाज करा रहे 12 लाख पीएलएचआईवी का नि:शुल्‍क वायरल लोड टेस्‍ट साल में कम से कम एक बार अवश्‍य कराया जा सकेगा.

 

  • यह वायरल लोड टेस्‍ट आजीवन एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी करा रहे मरीजों के इलाज की प्रभावशीलता की निगरानी करने की दृष्टि से विशेष महत्‍व रखता है.

  • नियमित वायरल लोड टेस्‍ट ‘फर्स्‍ट-लाइन रेजिमेंस (नियमानुसार परहेज)’ के उपयोग को अनुकूलित करेगा, जिससे एचआईवी से पीड़ित लोगों में दवा प्रतिरोध का निवारण हो सकेगा और उनकी दीर्घायु सुनिश्चित होगी.

  • वायरल लोड टेस्‍ट एआरटी से जुड़े चिकित्‍सा अधिकारियों को फर्स्‍ट-लाइन इलाज की विफलता के बारे में पहले ही पता लगाने में सक्षम बनाएगा और इस तरह यह पीएलएचआईवी को दवा का प्रतिरोध करने से बचाएगा.

  • यह एलएफयू (लॉस टू फॉलो अप) पीएलएचआईवी पर नजर रखने के मामले में ‘मिशन संपर्क’ को मजबूत करने में भी मददगार साबित होगा.

‘ट्रीट ऑल’ का शुभारंभ:

  • वर्ष 2017 में भारत ने एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) उपचार प्रोटोकॉल को संशोधित किया था, ताकि एआरटी वाले समस्‍त पीएलएचआईवी के लिए ‘ट्रीट ऑल’ का शुभारंभ हो सके.

  • यह ‘ट्रीट ऑल’ पहल इसलिए की गई थी, ताकि उपचार जल्‍द शुरू हो सके और व्‍यक्तिगत एवं समुदाय दोनों ही स्‍तरों पर वायरस के संचरण को कम किया जा सके.

  • वर्तमान में लगभग 12 लाख पीएलएचआईवी 530 से भी अधिक एआरटी केन्‍द्रों में मुफ्त उपचार का लाभ उठा रहे हैं.

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