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संयुक्त राष्ट्र महासभा ने पहली बार यौन उत्पीड़न के विरुद्ध प्रस्ताव को मंज़ूरी दी

संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति द्वारा पहली बार यौन उत्पीड़न के खिलाफ एक प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई है. इस प्रस्ताव में यौन उत्पीड़न के खिलाफ एक आदर्श ढाँचे का प्रस्ताव दिया गया है.

इस प्रस्ताव के तहत सदस्य राष्ट्रों से यौन उत्पीड़न सहित महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा की निंदा करने और ऐसी हिंसा को खत्म करने की नीति अपनाने का आग्रह किया गया है.

प्रस्ताव के मुख्य बिंदु

•    इस प्रस्ताव में कहा गया है कि सभी देशों को महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा को खत्म करने के संबंध में कड़े कदम उठाने चाहिए.

•    महिलाओं को यौन उत्पीड़न से सुरक्षित रखने के लिए किसी भी प्रकार की प्रथा या परंपरा को बीच में नहीं लाना चाहिए.

•    यह प्रस्ताव बाध्यकारी नहीं है इसीलिये इसमें सभी सदस्य देशों से महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न रोकने, इसे खत्म करने और इसे लेकर होने वाली सभी प्रकार की हिंसा से पीड़ितों की रक्षा करने की अपील की गई है.

•    इस प्रस्ताव में सभी महिलाओं और उनके यौन और प्रजनन स्वास्थ्य व प्रजनन अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया गया है.

•    सभी डिजिटल कम्पनियों को यौन उत्पीड़न को खत्म करने की दिशा में सकारात्मक उपायों को अपनाने के लिए भी कहा गया है.

महासभा की तीसरी समिति


संयुक्त राष्ट्र महासभा ऐसे सामाजिक, मानवीय और सांस्कृतिक मामलों को, जिनसे दुनियाभर के लोग प्रभावित हो सकते हैं,  जिस समिति को आवंटित करती है, उसे तीसरी समिति कहा जाता है. इस तीसरी समिति के कार्य का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों पर मानवाधिकार परिषद की रिपोर्ट्स पर फोकस करना है. यह समिति महिलाओं की प्रगति, बच्चों क्वे संरक्षण, घरेलू मामलों और शरणार्थियों से होने वाले व्यवहार के मामलों पर भी नज़र रखती है.

 

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