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यूएस ने वाशिंगटन में फिलिस्तीनी मिशन को बंद करने की घोषणा की

संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) ने 10 सितंबर 2018 को वाशिंगटन, डीसी में फिलिस्तीनी लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (पीएलओ) कार्यालय को बंद करने की घोषणा की.

इस कदम की व्याख्या करते हुए, अमेरिकी राज्य विभाग ने कहा कि पीएलओ नेता इसराइल में शांति स्थापना के अमरीकी प्रयासों का हिस्सा बनने में असफल हुए हैं और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) के माध्यम से इज़राइल की जांच शुरू कराने के प्रयास किए हैं.

फिलिस्तीनी मिशन को बंद करने का कारण:

पीएलओ ने इसराइल के साथ सीधी और सार्थक बातचीत की शुरुआत आगे बढ़ाने के लिए कोई क़दम नहीं उठाए हैं. इसके उलट पीएलओ ने बिना देखे अमरीकी शांति योजना की आलोचना की और शांति प्रयासों में अमरीकी सरकार के साथ काम करने से इनकार कर दिया.

इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (आईसीसी) में इज़राइल के खिलाफ युद्ध अपराधों की जांच करने के फिलिस्तीन के प्रयासों के चलते अमेरिका ने यह कदम उठाया है.

                  क्या है मामला?

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप काफ़ी समय से लंबित मध्य-पूर्व शांति योजना को लागू करने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन, दिसंबर 2017 में अमरीका ने जब यरुशलम को इज़राइल की राजधानी मानने का घोषणा किया था, उसके बाद से फिलिस्तीनी अधिकारियों ने इस योजना में अमरीका के साथ काम करने से इनकार कर दिया था.

फिलिस्तीनी लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (पीएलओ):

फिलिस्तीनी लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (पीएलओ), जो फिलीस्तीनी लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाली मुख्य इकाई के रूप में कार्य करता है.  पीएलओ की स्थापना 28 मई 1964 को हुई थी. इसका नेतृत्व महमूद अब्बास करते हैं. 100 से अधिक राष्ट्रों ने इसे फिलिस्तीनी लोगों का एकमात्र वैधानिक प्रतिनिधि स्वीकार किया है. यह वर्ष 1974 से संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रेक्षक के रूप में मान्य है.

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