अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप प्रशासन से भारत को फिर से GSP में शामिल करने का आग्रह किया

अमेरिका के 44 सांसदों ने ट्रंप प्रशासन से भारत को फिर से जीएसपी (Generalized System of Preferences) व्यापार कार्यक्रम में शामिल करने की मांग की है. सांसदों ने कहा की इससे दोनों देशों के मध्य व्यापारिक समझौते करने में आसानी होगी.

भारत को इससे पहले जीएसपी के अंतर्गत अमेरिका के साथ कारोबार में विशेष लाभार्थी का दर्जा प्राप्त था. अमेरिका ने जून 2019 में भारत को जीएसपी व्‍यवस्‍था से बाहर कर दिया था. अमेरिका के जीएसपी कार्यक्रम में शामिल होने वाले देशों को व्‍यापार में विशेष सहूलियत दी जाती है.

भारत को जीएसपी दर्जा देने की मांग वाले पत्र पर 26 डेमोक्रेट्स और 18 रिपब्लिकन सासंदों ने हस्ताक्षर किये हैं. सांसदों ने भारत से आयातित सामान पर जीएसपी का लाभ देने पर पूरी तरह से समर्थन किया है. इस समर्थन के बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को प्रोत्साहन मिल सकता है.

जीएसपी कार्यक्रम क्या है?

जीएसपी कार्यक्रम में शामिल देशों के हजारों उत्पादों को अमेरिका में कर-मुक्त छूट की अनुमति देकर आर्थिक विकास को बढ़ावा देने हेतु लाया गया था. अमेरिका ने जीएसपी की शुरुआत साल 1976 में विकासशील में आर्थिक वृद्धि बढ़ाने हेतु की थी. जीएसपी के तहत अभी तक करीब 129 देशों को लगभग 4,800 गुड्स हेतु फायदा मिला है.

जीएसपी को विभिन्न देशों से आने वाले हजारों उत्पादों को फ्री शुल्क प्रवेश की अनुमति देकर आर्थिक विकास को बढ़ावा देने हेतु बनाया गया था. भारत ने साल 2017 में जीएसपी के तहत अमेरिका को 5.6 अरब डॉलर से अधिक का कर-मुक्त निर्यात किया था.

अमेरिका के सांसदों ने कहा की भविष्य को ध्यान में रखते हुए हमें अपने उद्योगों हेतु बाजारों की उपलब्धता सुनिश्चित करानी होगी. इस पर छोटे-मोटे मामलों के कारण से असर नहीं पड़ना चाहिए.

जीएसपी से भारत को क्यों हटाया गया?

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का कहना था कि उन्हें भारत से यह सहमती नहीं मिल पाया है कि वे अपने बाजार में अमेरिकी उत्पादों को बराबर की छूट देगा. अमेरिका का कहना था कि भारत में प्रतिबंधों के वजह से उसे व्यापारिक नुकसान हो रहा है. वे जीएसपी के मापदंड पूरे करने में असफल रहा है.

ह्यूस्टन में भारतीय समुदाय की एक रैली को संबोधित करेंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 22 सितंबर 2019 को ह्यूस्टन में भारतीय समुदाय की एक रैली को संबोधित करेंगे. प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप इससे पहले फ्रांस के जी-7 समिट में मिल चुके हैं. प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति के बीच दो महीने में यह तीसरी मुलाकात होने वाली है. प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यक्रम हेतु 50 हजार से ज्यादा भारतीयों ने पंजीकरण कराया है.

यह भी पढ़ें: भारत और स्लोवेनिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने हेतु सात समझौतों पर हस्ताक्षर

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