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उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय समाजसेवी योजनाओं में 12 पुरस्कार जीते

केंद्र सरकार की योजनाओं के लिए दिए जाने वाले राष्ट्रीय पुरस्कारों में उत्तर प्रदेश को उत्तर प्रदेश को 12 पुरस्कार प्राप्त हुए हैं.

प्रधानमंत्री आवास योजना तथा कंवर्जंस कार्य के लिए नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने उत्तर प्रदेश को प्रथम पुरस्कार से पुरस्कृत किया. ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित इस पुरस्कार वितरण समारोह में उत्तर प्रदेश को 12 अवॉर्ड मिले.

मुख्य बिंदु

•    पीएम आवास योजना में उत्कृष्ट कार्य के लिए पहला पुरस्कार प्रदेश के ग्राम्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डा. महेंद्र सिंह ने प्राप्त किया.

•    ग्राम्य विकास विभाग को तीन अन्य श्रेणियों में भी पुरस्कृत किया गया.

•    लखनऊ तथा सीतापुर जनपद के जिलाधिकारियों को ग्राम स्वराज अभियान-सबका साथ, सबका गांव, सबका कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करने के लिए भी पुरस्कृत किया गया.

•    कार्यक्रम में राज्य, जिला, ब्लाक और पंचायत स्तर पर कार्यों के लिए भी प्रदेश के अधिकारी पुरस्कृत किए गए.

•    इस कार्यक्रम में प्रदेश में ग्राम स्वराज अभियान-सबका साथ, सबका गांव, सबका विकास कार्यक्रम संचालित किया गया था जिसमें उत्कृष्ट कार्य के लिए लखनऊ तथा सीतापुर के जिलाधिकारी को पुरस्कृत किया गया.

•    योजनाओं को सही ढंग से लागू करने पर जिला, ब्लॉक तथा पंचायत स्तर पर सबसे अच्छा कार्य करने वाले अधिकारी भी पुरस्कृत किए गए.

 

अन्य राज्य

लक्षदीप को सबसे कम केवल एक पुरस्कार मिला. विज्ञान भवन में हुए कार्यक्रम में 237 पुरस्कार वितरित किए गए. इसमें छत्तीसगढ़ ने सबसे ज्यादा 17 पुरस्कार  जीते उसे देश भर में गांवों को शहरों की तर्ज पर संवारने में पहला स्थान मिला. इसी क्रम में रोजगार देने में उसने पहला और दूसरा दोनों स्थान प्राप्त किया.

राष्ट्रीय पुरस्कारों के बारे में
मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं को  लागू कराने में पिछले एक साल में राज्य, जिलों प्रखंडों संगठनों और व्यक्तिगत तौर पर किए गए असाधारण कार्यों केलिए ग्रामीण विकास मंत्रालय राष्ट्रीय पुरस्कार देता है. इसमें ग्रामीण विकास मंत्रालय की 13 योजनाओं और ग्राम स्वराज एवं विस्तारित ग्राम स्वराज योजना की सात योजनाओं के लिए पुरस्कार दिए गए. इन पुरस्कारों का उद्देश्य राज्यों को प्रोत्साहित करना तथा विकास कार्यों के लिए प्रतिस्पर्धात्मक माहौल तैयार करना है.

 

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