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उत्तराखंड हाई कोर्ट ने राज्य में हाथियों के व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाई

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने 03 अगस्त 2018 को टाइगर रिजर्व में हाथियों के व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाई और राज्य वन विभाग को 24 घंटों के भीतर व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए तैनात हाथियों को बचाने के लिए दिशा निर्देश दिया है.

न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने वनाधिकारियों के माध्यम से मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को हाथियों के मालिकों को नोटिस जारी कर यह स्पष्टीकरण लेने को कहा है कि वह वन्यजीव संरक्षण कानून का उल्लंघन कर किस कानून के तहत हाथियों पर सवारी कराने सहित उनका व्यावसायिक उपयोग कर रहे हैं.


हाई कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश:

•    उत्तराखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि कार्बेट टाइगर रिजर्व के सीताबनी, बिजरानी और ढेला क्षेत्रों के अलावा कालागढ़ तथा राजाजी राष्ट्रीय पार्क में एक दिन में 100 से अधिक वाहनों को प्रवेश न करने दिए जाएं.

•    हाई कोर्ट ने मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को संबंधित प्रभागीय वन अधिकारियों के माध्यम से हाथियों के इलाज, चिकित्सकीय परीक्षण तथा देखरेख के लिए उन्हें उनके मालिकों से 24 घंटों के अंदर अपने कब्जे में लेने का भी निर्देश दिया है.

•    हाथियों को अस्थाई रूप से राजाजी राष्ट्रीय पार्क के चीला क्षेत्र में रखा जाएगा और घायल हाथियों को 12 घंटों के अंदर पशु चिकित्सकों द्वारा देखा जायेगा.


पृष्ठभूमि:

अदालत का यह आदेश तब आया जब उसे यह अवगत कराया गया कि कार्बेट टाइगर रिजर्व क्षेत्र में रिजार्ट के मालिकों द्वारा हाथियों के व्यावसायिक उपयोग के दौरान हाथियों को चेन से बांधा जा रहा है और उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है जिससे उनके साथ क्रूरता हो रही है.

न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने कहा कि हाथियों को बंधक बनाया जाना वन्यजीव संरक्षण कानून, 1975 की धारा 40 और 42 का उल्लंघन है.

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जीव-जंतुओं को इंसान की तरह कानूनी दर्जा दिया

 
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