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ग्रेटर टिपरालैंड की मांग के बारे में यहां पढ़ें महत्त्वपूर्ण जानकारी

त्रिपुरा के शाही वंशज प्रद्योत किशोर माणिक्य ने हाल ही में ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ की एक नई राजनीतिक मांग सामने रखी है. उनके कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के 17 महीने बाद यह मांग सामने आई है.

इस शाही वशंज का दावा है कि 'ग्रेटर टिपरालैंड' की उनकी मांग बांग्लादेश में खगराचारी, बंदरबन, चटगांव और अन्य निकटवर्ती सीमावर्ती क्षेत्रों में भारत के बाहर रहने वाले आदिवासियों, गैर-आदिवासियों के साथ-साथ त्रिपुरा में रहने वाले सभी आदिवासियों के हित में काम करेगी.

ग्रेटर टिपरालैंड क्या है?

‘ग्रेटर टिपरालैंड’ सत्तारूढ़ इंडिजेनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (IPFT) की एक टिपरालैंड की मांग का विस्तार है, जिसके तहत त्रिपुरा के आदिवासियों के लिए एक अलग राज्य बनाने का प्रयास किया जा रहा है.

नई ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ मांग में त्रिपुरा ट्राइबल एरिया ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (TTAADC) के बाहर देशी क्षेत्रों/ गांवों में रहने वाले सभी आदिवासियों को शामिल किया जाएगा.  

क्या इसका मतलब त्रिपुरा की क्षेत्रीय सीमा रेखाओं को अन्य राज्यों के हिस्सों को शामिल करना है?

जब त्रिपुरा में असम, मिजोरम और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों सहित त्रिपुरा की क्षेत्रीय सीमा रेखाओं को फिर से निर्धारित करने के बारे में चर्चा की गई, तो त्रिपुरा शाही वंशज प्रद्योत किशोर माणिक्य ने इस बारे में कुछ नहीं बताया.

ग्रेटर टिपरालैंड की मांग क्यों बढ़ गई है?

त्रिपुरा में पिछले दिनों CAA के विरोध में और NRC को संशोधित करने की अधूरी मांगों के कारण ग्रेटर टिपरालैंड की मांग में तेजी आई है.

क्या ग्रेटर टिपरालैंड की मांग ग्रेटर नगालिम की मांग के समान है?

• ग्रेटर नागालिम की मांग को विद्रोही नागा संगठन-नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड - इसाक-मुइवा (NSCN-IM) द्वारा पहले से रखा गया था.
• इस मांग के पीछे मुख्य उद्देश्य ग्रेटर नागालिम (ग्रेटर नागालैंड) की स्थापना थी, जिसमें असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर के सभी नागा लोगों के बसे हुए इलाके और म्यांमार के हिस्से शामिल थे.
• ग्रेटर नागालिम की मांग ने असम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में आंदोलन खड़ा कर दिया. इस प्रस्ताव का उद्देश्य मणिपुर, असम या अरुणाचल में रहने वाले सभी नागा लोगों को लाभान्वित करना था.

पृष्ठभूमि

त्रिपुरा के शाही वंशज प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा का सामाजिक संगठन - इंडिजेनस पीपुल्स रीजनल अलायंस (TIPRA) त्रिपुरा की सबसे बड़ी आदिवासी राजनीतिक पार्टी के तौर पर उभरा है.

19 फरवरी, 2021 को पार्टी ने दो आदिवासी राजनीतिक दलों, टिपरालैंड स्टेट पार्टी और इंडिजेनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा - टिपराहा के साथ विलय की घोषणा की थी. TIPRA को टिपराहा इंडिजेनस पीपुल्स रीजनल अलायंस के तौर पर नया नाम दिया गया.

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