भारतीय वन्यजीव संस्थान (देहरादून) में भारत के प्रथम टाइगर सेल का शुभारंभ

भारतीय वन्यजीव संस्थान में अगस्त 2016 के पहले सप्ताह में भारत का प्रथम टाइगर सेल का शुभारंभ किया गया है. देहरादून में स्थित भारतीय वन्य जीव संस्थान में टाइगर सेल स्थापित किया गया है.

इससे देश में बाघों के संरक्षण की कार्ययोजना को मजबूती मिलेगी. टाइगर सेल में बाघों का डीएनए बैंक भी स्थापित किया गया है. इसमें देश के सभी 50 टाइगर रिजर्व के बाघों के डीएनए सैंपल उपलब्ध रहेंगे. वन्य जीव तस्करों के पास से खालें बरामद होने पर यहां से यह पता लगाया जा सकेगा कि बाघ किस क्षेत्र का रहा है.

डीएनए बैंक में देश के अधिकांश क्षेत्रों के बाघों के डीएनए सैंपल जमा कर लिए गए हैं. बाघों के संरक्षण के साथ टाइगर सेल वन्य जीव आरक्षित क्षेत्रों में विकास कार्यों का रोड मैप भी तैयार करेगा.

टाइगर सेल के रोड मैप से ही तय होगा कि क्षेत्र में कहां-कहां और किस हद का विकास कार्य कराए जा सकते हैं. बाघों की खाल पकड़े जाने पर प्रदेश अब एक-दूसरे पर जिम्मेदारी नहीं डाल पाएंगे.

इससे बाघों पर शोध कर रहे विज्ञानियों को भी आसानी होगी. उन्हें एक ही स्थान पर देश के सभी टाइगर रिजर्व के बाघों की जानकारी उपलब्ध हो जाएगी. टाइगर सेल को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण फंड उपलब्ध कराएगा.

भारतीय वन्यजीव संस्थान के बारे में:

•    भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून, उत्तराखण्ड में स्थित है.

•    इसकी स्थापना 1906 में की गई थी.

•    मुख्य भवन का वास्तुशिल्प यूनानी-रोमन और औपनिवेशिक शैली में बना हुआ है.

•    भारतीय वन्यजीव संस्थान के संस्थापक वी. बी. सहरिया थे.

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