विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस 2020: जानिये थीम, पृष्ठभूमि और भारत की भूमिका

विश्व भर में प्रत्येक वर्ष 15 मार्च 2020 को विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाया गया. इस अवसर पर उपभोक्ताओं को उनके कन्ज्यूमर राइट्स अथवा उपभोक्ता अधिकारों के प्रति जागरुक करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं. इस दिवस को मनाये जाने का उद्देश्य ग्राहकों को किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से बचाना और उन्हें जागरुक बनाना है.

विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस दुनिया भर के देशों द्वारा मानवाधिकारों पर सम्मेलन आयोजित करके और उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए विभिन्न तरीकों पर चर्चा आयोजित करके मनाया जाता है. अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के अलावा भारत में 24 दिसम्बर को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस मनाया जाता है.

इस वर्ष की थीम

विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस 2020 की थीम है ‘The Sustainable Consumer' अर्थात् सतत ग्राहक. यह थीम विश्व स्तर पर स्थायी उपभोग की आवश्यकता और उपभोक्ता अधिकारों और संरक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालती है. इस दिवस के लिए प्रत्येक वर्ष एक अलग विषय चुना जाता है. विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस 2020 की थीम का उद्देश्य पर्यावरण को हो रहे नुकसान के बारे में लोगों को बताना और वैश्विक जलवायु परिवर्तन के बारे में जागरूकता फैलाना है.

पृष्ठभूमि

• वर्ष 2019 में इस दिवस की थीम ‘विश्वसनीय स्मार्ट उत्पाद’ (Trusted Smart Products) था.
• विश्व में पहली बार भूतपूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी द्वारा 15 मार्च 1983 को अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाया था.
• कैनेडी ने अपने भाषण में पहली बार उपभोक्ता अधिकारों की परिभाषा को रेखांकित किया. वे विश्व के पहले व्यक्ति माने जाते हैं जिन्होंने औपचारिक रूप से 'उपभोक्ता अधिकारों' को परिभाषित किया था. इसके बाद प्रतिवर्ष इसे 15 मार्च से मनाया जाने लगा है.
• गौरतलब है कि भारत में प्रतिवर्ष 24 दिसंबर, को ‘राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस’ मनाया जाता है.
• उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम उपभोक्ताओं के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य सहित संयुक्त मार्गदर्शी सिद्धांतों के आधार पर 1986 में लागू किया गया था.

भारत की भूमिका

भारत में उपभोक्ता आंदोलन की शुरुआत 1966 में मुंबई से हुई थी. वर्ष 1974 में पुणे में ग्राहक पंचायत की स्थापना के बाद अनेक राज्यों में उपभोक्ता कल्याण हेतु संस्थाओं का गठन किया गया और यह आंदोलन बढ़ता गया. 9 दिसंबर 1986 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पहल पर उपभोक्ता संरक्षण विधेयक पारित किया गया और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बार देशभर में लागू हुआ. इसके बाद 24 दिसंबर को भारत में राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण दिवस मनाने का निर्णय लिया गया.

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