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विश्व तंबाकू निषेध दिवस विश्व भर में मनाया गया

विश्व तंबाकू निषेध दिवस 31 मई 2018 को विश्व भर में मनाया गया. तंबाकू उत्पादों का अवैध व्यापार स्वास्थ्य, कानूनी और आर्थिक, शासन और भ्रष्टाचार सहित प्रमुख वैश्विक चिंता का विषय है.

 विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2018 का थीम: तंबाकू और हृदय रोग (Tobacco and heart disease)

                                                         उद्देश्य

दूसरों पर इसकी जटिलताओं के साथ ही तंबाकू इस्तेमाल के नुकसानदायक प्रभाव के संदेश को फैलाने के लिये वैश्विक तौर पर लोगों का ध्यान खींचना इस उत्सव का लक्ष्य है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर सभी देशों से तंबाकू उत्पादों पर कर बढ़ाने की अपील की है ताकि नये लोगों को तंबाकू सेवन का आदी होने से बचाया जा सके.

यह दिन सभी रूपों में तंबाकू की और तंबाकू की खपत को कम करने के लिए प्रभावी नीतियों की वकालत करता है और तंबाकू खपत से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों पर प्रकाश डालता है.

 

विश्व तंबाकू निषेध दिवस क्यों मनाया जाता है?

पूरे विश्व के लोगों को तंबाकू मुक्त और स्वस्थ बनाने के लिये तथा सभी स्वास्थ्य खतरों से बचाने के लिये तंबाकू चबाने या धुम्रपान के द्वारा होने वाले सभी परेशानियों से बचाने हेतु विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य देशों ने वर्ष 1987 में विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाये जाने की घोषणा की थी.

                                                     डब्ल्यूएचओ के आकड़ों के अनुसार


विश्व स्वास्थ्य संगठन की घोषणा के आधार पर इस समय समूचे विश्व में प्रतिवर्ष 50 लाख से अधिक व्यक्ति धूम्रपान के सेवन के कारण अपनी जान से हाथ धो रहे हैं. उल्लेखनीय है कि यदि इस समस्या को नियंत्रित करने की दिशा में कोई प्रभावी क़दम नहीं उठाया गया तो वर्ष 2030 में धूम्रपान के सेवन से मरने वाले व्यक्तियों की संख्या प्रतिवर्ष 80 लाख से अधिक हो जायेगी.

तंबाकू उत्पादों पर 50 प्रतिशत की कर बढ़ोत्तरी से तीन वर्षों में तंबाकू सेवन करने वालों की संख्या घटकर 49 मिलियन हो जाएगी और इस प्रकार 11 मिलियन लोगों का जीवन बचा सकते हैं.

तंबाकू के सेवन से हर वर्ष 10 में कम से कम एक व्यक्ति की मौत जरुर हो जाती है जबकि पूरे विश्व भर में 1.3 बिलियन लोग तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं.

वर्ष 2020 तक 20-25% तंबाकू के इस्तेमाल को घटाने के द्वारा हम लगभग 100 मिलीयन लोगों की असामयिक मृत्यु को नियंत्रित कर सकते हैं.

डब्ल्यूएचओ आकड़ों के अनुसार, प्रत्येक वर्ष छह मिलियन लोग तंबाकू के सेवन के कारण मर जाते हैं.

 

तंबाकू से बढ़ता है कैंसर का खतरा:

तंबाकू से लगभग 25 तरह की शारीरिक बीमारियां और लगभग 40 तरह के कैंसर हो सकते हैं. इनमें मुंह का कैंसर, गले का कैंसर, फेफड़े का कैंसर, प्रोस्टेट ग्रंथि का कैंसर, पेट का कैंसर और ब्रेन ट्यूमर आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं.

                                                    तंबाकू के प्रभाव से होने वाले दुष्परिणाम

तंबाकू में अत्यधिक नशे की आदत वाला निकोटीन नामक पदार्थ होता है.

निकोटीन आपको कुछ समय के लिए बेहत्तर महसूस कराता हैं, लेकिन इसका लंबे समय तक उपयोग, आपके हृदय, फेफड़े और पेट के साथ-साथ आपके तंत्रिका तंत्र को भी प्रभावित करता हैं जिससे खाँसी और गले में परेशानी होना, धब्बेदार त्वचा, दांतों का रंग ख़राब (दांतों का पीलापन) होना आदि है.

एक अवधि के बाद, व्यक्ति का शरीर, शारीरिक और भावनात्मक स्तर पर निकोटीन का आदी हो जाता है तथा अंत में व्यक्ति गंभीर स्वास्थ्यगत समस्याओं से पीड़ित हो जाता है.

 

                                                                  निकोटिन का दुष्प्रभाव

तंबाकू में हजारों तरह के रासायनिक तत्व या केमिकल्स होते हैं, जिसमें से कई तत्व कैंसर बनने का कारण बनते हैं.

तंबाकू में निकोटिन भी पाई जाती है, जो शरीर के लिए नुकसानदेह पदार्थ है.

गौरतलब है कि निकोटिन के कारण ही तंबाकू खाने की तलब लगती है.

तंबाकू का सेवन सबसे ज्यादा मुंह के कैंसर के खतरे को बढ़ाता है.

यह भी पढ़ें: संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय शांति सैनिक दिवस-2018 मनाया गया

 
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