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विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाया गया

03 मई: विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस

विश्व भर में 03 मई 2018 को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाया गया. इस वर्ष का विषय था -  ‘कीपिंग पावर इन चेक: मीडिया, जस्टिस एंड द रूल ऑफ लॉ’ (Keeping Power in Check: Media, Justice and The Rule of Law).

 

उद्देश्य:

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस का उद्देश्य प्रेस की आजादी के महत्त्व के प्रति जागरूकता फैलाना है. प्रेस की आजादी और समाचारों को लोगों तक पहुंचाकर, सशक्त हो रहे मीडियाकर्मियों का व्यापक विकास करना इसका उद्देश्य है.

 

गौरतलब है कि भारत में प्रेस की स्वतंत्रता भारतीय संविधान के अनुच्छेद-19 में भारतीयों को दिए गए अभिव्यक्ति की आजादी के मूल अधिकार से सुनिश्चित होती है.

मीडिया की आज़ादी का मतलब है कि किसी भी व्यक्ति को अपनी राय कायम करने और सार्वजनिक तौर पर इसे जाहिर करने का अधिकार है. इसका आयोजन संयुक्त रूप से फ्रांस, ग्रीस और लिथुआनिया के स्थायी मिशन द्वारा किया जाता है.

 

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस:

विश्व स्तर पर प्रेस की आजादी को सम्मान देने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा द्वारा 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस घोषित किया गया, जिसे विश्व प्रेस दिवस के रूप में भी जाना जाता है.

यूनेस्को द्वारा वर्ष 1997 से हर साल 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर गिलेरमो कानो वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम प्राइज भी दिया जाता है. यह पुरस्कार उस व्यक्ति अथवा संस्थान को दिया जाता है जिसने प्रेस की स्वतंत्रता के लिए उल्लेखनीय कार्य किया हो.

 

भारत में प्रेस की स्थिति:

भारत जैसे विकासशील देशों में मीडिया पर जातिवाद और सम्‍प्रदायवाद जैसे संकुचित विचारों के ख़िलाफ़ संघर्ष करने और ग़रीबी तथा अन्‍य सामाजिक बुराइयों के ख़िलाफ़ लड़ाई में लोगों की सहायता करने की बहुत बड़ी जिम्‍मेदारी है. लोगों का एक बहुत बड़ा वर्ग पिछड़ा और अनभिज्ञ है, इसलिये यह और भी ज़रूरी है कि आधुनिक विचार उन तक पहुंचाए जाएं और उनका पिछड़ापन दूर किया जाए, ताकि वे सजग भारत का हिस्‍सा बन सकें.

 

 यह भी पढ़ें: अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस विश्व भर में मनाया गया

 

विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत 138वें स्थान पर

अंतरराष्ट्रीय संस्था, रिपोर्टर्स विदऑउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) द्वारा 25 अप्रैल 2018 को विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक-2018 रिपोर्ट जारी की गयी. इस रिपोर्ट में भारत की रैकिंग पिछले वर्ष की तुलना में दो स्थान गिरकर 138वें स्थान पर पहुंच गई है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में सोशल मीडिया नेटवर्क द्वारा पत्रकारों के खिलाफ नफरत फैलाई जा रही है तथा उनके खिलाफ हिंसक घटनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है. भारत 2017 में 136 वें स्थान पर था और अब दो अंक कम होकर 138 पर पहुंच गया है. इस सर्वेक्षण में कुल 180 देशों को शामिल किया गया है.

 
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