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गंगा विश्व की सबसे संकटग्रस्त नदियों में से एक: डब्ल्यूडब्ल्यूएफ रिपोर्ट

वर्ल्ड वाइड फंड फोर नेचर (WWF) द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार गंगा विश्व की सबसे अधिक संकटग्रस्त नदियों में से एक है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि लगभग सभी दूसरी भारतीय नदियों की तरह गंगा में लगातार पहले बाढ़ और फिर सूखे की स्थिति पैदा हो रही है.

देश के सबसे पवित्र स्थानों में शामिल ऋषिकेश, हरिद्वार, प्रयाग और काशी, गंगा के तट पर स्थित हैं. इसके अलावा केदारनाथ, बद्रीनाथ और गोमुख गंगा और उसकी उपनदियों के किनारे स्थित तीर्थ स्थानों में से एक हैं. जिन चार स्थानों पर कुंभ मेला लगता है, उनमें से दो शहर हरिद्वार और प्रयाग गंगा तट पर स्थित हैं.

गंगा नदी के बारे में WWF की रिपोर्ट

•    रिपोर्ट के अनुसार गंगा ऋषिकेश से ही प्रदूषित हो रही है.

•    गंगा के किनारे लगातार बसायी जा रही बस्तियों चन्द्रभागा, मायाकुंड, शीशम झाड़ी में शौचालय तक नहीं हैं. इसलिए यह गंदगी भी गंगा में मिल रही है.

•    कानपुर की ओर 400 किलोमीटर विपरीत जाने पर गंगा की दशा सबसे दयनीय दिखती है.

•    ऋषिकेश से लेकर कोलकाता तक गंगा के किनारे परमाणु बिजलीघर से लेकर रासायनिक खाद तक के कारखाने लगे हैं जिसके कारण गंगा लगातार प्रदूषित हो रही है.

•    गंगा के पानी में विषैले हानिकारक तत्व मिलकर इसे विश्व की सबसे भयावह नदियों में से एक बनाते हैं.

•    इसका एक अन्य सबसे महत्वपूर्ण कारण इसमें प्रत्येक वर्ष भारी बाढ़ आना तथा फिर सूखे की स्थिति झेलना है.

गंगा नदी के बारे में जानकारी

देश की सबसे प्राचीन और लंबी नदी गंगा उत्तराखंड के कुमायूं में हिमालय के गोमुख नामक स्थान पर गंगोत्री हिमनद से निकलती है. गंगा के इस उद्गम स्थल की ऊंचाई समुद्र तल से 3140 मीटर है. उत्तराखंड में हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी के सुंदरवन तक गंगा विशाल भू-भाग को सींचती है. गंगा भारत में 2,071 किमी और उसके बाद बांग्लादेश में अपनी सहायक नदियों के साथ 10 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के अति विशाल उपजाऊ मैदान की रचना करती है. यमुना गंगा की सबसे प्रमुख सहायक नदी है, जो हिमालय की बंदरपूंछ चोटी के यमुनोत्री हिमखण्ड से निकलती है. गंगा उत्तराखंड में 110 किमी, उत्तर प्रदेश में 1,450 किलोमीटर , बिहार में 445 किमी और पश्चिम बंगाल में 520 किमी का सफर तय करते हुए बंगाल की खाड़ी में मिलती है.


डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के बारे में जानकारी

•    पर्यावरण संरक्षण हेतु विश्वव्यापी कोष का गठन वर्ष 1961 में हुआ तथा उसी वर्ष इसका पंजीकरण एक गैर-लाभकारी संगठन के रूप में हुआ.

•    यह संगठन पर्यावरण के संरक्षण, अनुसंधान एवं रख-रखाव संबंधी मामलों पर कार्य करता है.

•    डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के प्रमुख उद्देश्य हैं - आनुवंशिक जीवों और पारिस्थितिक विभिन्नताओं का संरक्षण करना. यह सुनिश्चित करना कि नवीकरण योग्य प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग पृथ्वी के सभी जीवों के वर्तमान और भावी हितों के अनुरूप हो रहा है अथवा नहीं.

•    इसका अन्य उद्देश्य प्रदूषण, संसाधनों और उर्जा के अपव्ययीय दोहन और खपत को न्यूनतम स्तर पर लाना भी है.


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