आसियान : भारत-प्रशांत क्षेत्र के साथ भारत की बढ़ती नजदीकियां

नवम्बर 2017 के पहले सप्ताह में 25 वें भारत-आसियान शिखर सम्मेलन, 12 वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन, भारत-अमरीका-जापान-ऑस्ट्रेलिया चतुर्भुज की बैठक तथा आरसीईपी शिखर सम्मेलन की पहली बैठक में भाग लेने के लिए भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी फिलिपिंस में थे. इन क्षेत्र के नेताओं के साथ बैठक की श्रृंखला में इंडिया पेसिफिक राष्ट्रों के साथ भारत की राजनीतिक, आर्थिक और सामरिक भागीदारी बढ़ने के संकेत के साथ साथ भारत की ईस्ट पॉलिसी पर विशेष जोर दिया गया. अतः भारत के लिए भारत-प्रशांत क्षेत्र की प्रासंगिकता, साझेदारी के अवसरों और इस क्षेत्र में भारत के समक्ष आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करना जरुरी है.

Created On: Jan 31, 2018 12:33 IST
ASEAN-India Commemorative Summit 2018
ASEAN-India Commemorative Summit 2018

नवम्बर 2017 के पहले सप्ताह में 25 वें भारत-आसियान शिखर सम्मेलन, 12 वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन, भारत-अमरीका-जापान-ऑस्ट्रेलिया चतुर्भुज की बैठक तथा आरसीईपी शिखर सम्मेलन की पहली बैठक में भाग लेने के लिए भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी फिलिपिंस में थे. इन क्षेत्र के नेताओं के साथ बैठक की श्रृंखला में इंडिया पेसिफिक राष्ट्रों के साथ भारत की राजनीतिक, आर्थिक और सामरिक भागीदारी बढ़ने के संकेत के साथ साथ भारत की ईस्ट पॉलिसी पर विशेष जोर दिया गया. अतः भारत के लिए भारत-प्रशांत क्षेत्र की प्रासंगिकता, साझेदारी के अवसरों और इस क्षेत्र में भारत के समक्ष आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करना जरुरी है.

 

CA eBook

भारत के लिए भारत-प्रशांत क्षेत्र की प्रासंगिकता

प्रशांत सेंचुरी: 21 वीं सदी को प्रशांत सेंचुरी और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के रूप में वर्णित किया गया है जो आने वाले दशकों में वैश्विक राजनीति, व्यापार और रणनीतिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
हालांकि 'इंडो-पैसिफ़िक' एशिया-प्रशांत क्षेत्र से अलग है.चीन, जापान, सिंगापुर, अमेरिका, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा दोनों ही क्षेत्रों के निश्चित मानदंड को पूरा करते हैं. इन लोकतांत्रिक राष्ट्रों की वित्तीय और सैन्य शक्ति को ध्यान में रखते हुए यह स्पष्ट है कि भारत उनके साथ हाथ मिलाकर  साझेदारी का निर्णय ले.

ब्लू अर्थव्यवस्था: महासागर पहले से ही नौवहन, प्राकृतिक संसाधन खनन, मछली पकड़ने और पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधियों के केंद्र रहे हैं. हाल के वर्षों में महासागर नए उद्योगों के केंद्र बन गए हैं, जैसे कि मत्स्यपालन, समुद्री जैव प्रौद्योगिकी, महासागर ऊर्जा और समुद्री बिस्तरों का खनन आदि जिसमें रोजगार पैदा करने और विश्व की आर्थिक स्थिति में सुधार करने की अदम्य क्षमता है.इन संसाधनों का विश्व के सबसे बड़े (प्रशांत) और विश्व के तीसरे सबसे बड़े महासागर (हिंद महासागर) में स्थायी तरीके से शोषण करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी हेतु एक समावेशी रूपरेखा की आवश्यक्ता है. जैसा कि भारत के पिछले हिस्से में प्रशांत महासागर है तथा अपने विशाल पड़ोसी क्षेत्र में हिंद महासागर मौजूद है इसलिए इसके द्वारा महासागर-आधारित ब्लू अर्थव्यवस्था की पूरी क्षमता का एहसास कराने के लिए क्षेत्रीय परामर्श प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी की जानी चाहिए.

चीन फैक्टर: इसमें कोई संदेह नहीं कि चीन आने वाले दशकों में संयुक्त राज्य अमेरिका को वैश्विक आर्थिक महाशक्ति के पद से उखाड़ फेंकने के लिए तैयार है. इसके अलावा चीन की बढ़ती क्षेत्रीय और समुद्री महत्वाकांक्षा, जो दक्षिण चीन सागर और डॉकलाम में होने वाली घटनाओं से साफ स्पष्ट होती है, भारत के लिए एक कठिन चुनौती बन सकती है. इसलिए भारत के लिए यह जरुरी है कि वह चीन के प्रतियोगी राष्ट्रों के साथ अपना एक गठबंधन बनाये. अमरीका और जापान का वार्षिक मालाबार नौसेना अभ्यास और ऑस्ट्रेलिया में क्वैड पार्टनरशिप में शामिल करने से भारत-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती नजदीकियों को चीन संदेह की दृष्टि से देख रहा है.

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग : क्षेत्र, योजनाएं और चुनौतियाँ

साझेदारी के रास्ते

आसियान: एसोसिएशन ऑफ साउथ-ईस्ट एशियन नेशंस (आसियान) में इंडोनेशिया, सिंगापुर, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई, थाईलैंड, कंबोडिया, लाओस, म्यांमार और वियतनाम आदि राष्ट्र शामिल हैं. वस्तुतः आसियान के साथ बहुपक्षीय संबंध रखने की भारत की इच्छा 1990 की शुरुआत से और आर्थिक उदारीकरण की दिशा में भारत की अपनी यात्रा के बाद से दुनिया के राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव का परिणाम है. भारत और आसियान सदस्य राज्यों में भारत और आसियान दोनों देशों की गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला के उपक्रम के तहत वर्ष 2017 तक भारत और आसियान 25 वर्षों से वार्ता साझेदारी,15 वर्षों से शिखर सम्मलेन तथा 5 वर्षों से रणनीतिक साझेदारी में एक दूसरे के साथ संलग्न हैं. ये नई दिल्ली में जनवरी 2018 में शेयर्ड वैल्यूज और कॉमन डेस्टिनी थीम वाले एक शिखर सम्मलेन का आयोजन करेंगे.

पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन: भारत 18 सदस्यीय पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन (ईएएस) समूह का सदस्य है जिसमें यूरेशियन और अमेरिका के ऑस्ट्रेलिया, ब्रुनेई, चीन, इंडोनेशिया, जापान, रूस, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, संयुक्त राज्य अमेरिका, आदि जैसे प्रमुख देश शामिल हैं. हालांकि आसियान देश पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन के केंद्र विन्दु हैं और भारत को एक बेहतर विकल्प के रूप में देखा जाता है लेकिन भारत इसकी सदस्यता का आनंद नहीं उठा पाता है.

फोरम फॉर इंडिया-पॅसिफ़िक आईलैंड्स कोऑपरेशन (एफआईपीआईसी): यह भारत और 14 प्रशांत द्वीपसमूह के देशों, कुक द्वीपसमूह, फिजी, किरिबाती, मार्शल द्वीप, माइक्रोनेशिया, नाउरू, नीयू, सामोआ, सोलोमन द्वीप, पलाऊ, पापुआ न्यू गिनी, टोंगा, तुवालू और भारत के बीच सहयोग के लिए 2014 में गठित एक बहुराष्ट्रीय संगठन है.यह प्रशांत क्षेत्र में कुछ महत्वपूर्ण शक्ति प्रदान करने में भारत को सहायता करता है.

आसियान,पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन तथा फोरम फॉर इंडिया-पॅसिफ़िक आईलैंड्स कोऑपरेशन (एफआईपीआईसी) के साथ साथ बिम्सटेक,एशियन रीजनल फोरम और रीजनल कॉम्प्रिहेन्सिव इकॉनोमिक पार्टनरशिप के द्वारा भी भारत को इन क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए मदद की जाती है.

भारत में पर्यटन - वर्तमान स्थिति, अवसर और चुनौतियाँ

भारत के लिए चुनौतियां

चीनी चुनौती: भारत-प्रशांत क्षेत्र में भारत के लिए महत्वपूर्ण चुनौती चीन के साथ अपने संबंधों को संतुलित करना है. चएक तरफ भारत के लिए चीन सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है तो  दूसरी तरफ इसे संभावित सुरक्षा खतरे के रूप में भी माना जाता है. अनसुलझे सीमा के मुद्दों, एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के संसाधनों और बाजारों के लिए प्रतिस्पर्धा, चीन घेराव की रणनीति, वन बेल्ट वन रोड (ओबीओआर) और संबंधित सीपीईई पर विवाद द्विपक्षीय संबंधों पर बार बार अघात कर रहे हैं. इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि भारत-प्रशांत क्षेत्र के सभी बड़े और छोटे राष्ट्र चीन के साथ गहरे आर्थिक संबंध रखते हैं, यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि भारत को बहुपक्षीय क्षेत्र के समूह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए चीन के साथ अपने द्विपक्षीय मुद्दों को समझदारी से हल करना चाहिए.

प्रतिस्पर्धी रुचियां: संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा को छोड़कर  भारत का आर्थिक ढांचा कृषि के प्रभुत्व, सस्ते मानव संसाधन, प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता आदि में अधिकांश देशों के समान है. पेटेंट, श्रम कानून, डंपिंग, समुद्री चहारदीवारी को सम्मिलित करने संबंधी मुद्दों के अतिरिक्त तस्करी और आतंकवादी गतिविधियां  भारत के लिए इन बहुपक्षीय राष्टों के साथ आर्थिक और व्यापार भागीदारी निभाने में बाधा उत्पन्न कर सकती हैं .

संपर्क: आर्थिक, व्यापार और राजनीतिक संबंध बनाए रखने के लिए कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण है. पूर्वोत्तर राज्यों और म्यांमार में दुर्जेय हिमालय, मलक्का के जलसंयोगी संकीर्ण क्षेत्र, तस्करी और चोरी, भू-द्रव्यमान और महासागरों की भौगोलिक सेटिंग और कनेक्टिविटी परियोजनाओं में निवेश करने में छोटे द्वीप राष्ट्रों की असमर्थता भारत का इस क्षेत्र में प्रभुत्व बढ़ाने या नजदीकी बनाने में बाधा डाल रही हैं.

निष्कर्ष

2004 में  भारतीय समुद्री सिद्धांत ने मेरीटाइम फोकस का झुकाव अटलांटिक- प्रशांत गठबंधन से हटकर प्रशांत इंडियन की तरफ होने के मुख्य कारण की व्याख्या की. विभिन्न अवसरों पर  भारत-प्रशांत क्षेत्र के सम्बन्ध में भारत का दृष्टिकोण आसियान के साथ इसके बढ़ते सहयोग को स्पष्ट परिलक्षित करते हैं. इन क्षेत्रों के साथ भारत की बढ़ती नजदीकियों को अमेरिका की एशिया नीति के तहत एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के रूप में न तो अमेरिका की इच्छाशक्ति से तय किया जाना चाहिए और न ही जापान के चीन विरोधी बदलावों से विचलित होना चाहिए.

भारत में खेल : समस्याएं और उन्हें सुधारने के उपाय

Take Weekly Tests on app for exam prep and compete with others. Download Current Affairs and GK app

एग्जाम की तैयारी के लिए ऐप पर वीकली टेस्ट लें और दूसरों के साथ प्रतिस्पर्धा करें। डाउनलोड करें करेंट अफेयर्स ऐप

AndroidIOS

Monthly Current Affairs PDF

  • Current Affairs PDF November 2021
  • Current Affairs PDF October 2021
  • Current Affairs PDF September 2021
  • Current Affairs PDF August 2021
  • Current Affairs PDF July 2021
  • Current Affairs PDF June 2021
View all

Monthly Current Affairs Quiz PDF

  • Current Affairs Quiz PDF November 2021
  • Current Affairs Quiz PDF October 2021
  • Current Affairs Quiz PDF September 2021
  • Current Affairs Quiz PDF August 2021
  • Current Affairs Quiz PDF July 2021
  • Current Affairs Quiz PDF June 2021
View all
Comment (0)

Post Comment

7 + 9 =
Post
Disclaimer: Comments will be moderated by Jagranjosh editorial team. Comments that are abusive, personal, incendiary or irrelevant will not be published. Please use a genuine email ID and provide your name, to avoid rejection.
    Whatsapp IconGet Updates

    Just Now