भारतीय बॉक्सर डिंको सिंह का निधन

मणिपुर के रहने वाले डिंको सिंह को साल 1998 में अर्जुन पुरस्कार और साल 2013 में पद्म श्री से नवाजा गया था. वह मैरीकॉम जैसे कई स्टार बॉक्सर के रोल मॉडल रहे.

Created On: Jun 10, 2021 16:00 ISTModified On: Jun 10, 2021 15:43 IST

भारत के पूर्व बॉक्सर और एशियन गेम्स के गोल्ड मेडलिस्ट डिंको सिंह का 10 जून 2021 को निधन हो गया. वे 42 साल के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे. डिंको सिंह को साल 2017 से लिवर कैंसर था. उन्हें भारत के सबसे बेहतरीन बॉक्सर्स में से एक माना जाता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, खेल मंत्री किरण रिजिजू, मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह, बॉक्सर मैरी कॉम, विकास कृष्णन और विजेंदर सिंह ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. प्रधानमंत्री ने कहा कि वह एक उत्कृष्ट मुक्केबाज थे जिन्होंने मुक्केबाजी की लोकप्रियता बढ़ाने में काफी योगदान दिया. उनके निधन से दुखी हूं. उनके परिवार के सदस्यों और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं.

खेल मंत्री किरण रिजिजू ने  क्या कहा?

डिंको सिंह के निधन पर केंद्रीय खेल मंत्री किरण रिजिजू ने भी दुःख प्रकट किया. रिजिजू ने ट्वीट किया कि मैं ​डिंको सिंह के निधन से बहुत दुखी हूं. वह भारत के सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाजों में से एक थे. डिंको सिंह के 1998 बैकॉक एशियाई खेलों में जीते गए स्वर्ण पदक ने भारत में मुक्केबाजी क्रांति को जन्म दिया. मैं शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे.

डिंको सिंह के बारे में

मणिपुर के रहने वाले डिंको सिंह को साल 1998 में अर्जुन पुरस्कार और साल 2013 में पद्म श्री से नवाजा गया था. वह मैरीकॉम जैसे कई स्टार बॉक्सर के रोल मॉडल रहे.

मणिपुर के इस सुपरस्टार ने 10 वर्ष की उम्र में अपना पहला राष्ट्रीय खिताब (सब जूनियर) जीता था.

वे भारतीय मुक्केबाजी के पहले स्टार मुक्केबाज थे जिनके एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक से, छह बार की विश्व चैंपियन एम सी मैरीकॉम सहित कई खिलाड़ी इस खेल से जुड़ने के लिये प्रेरित हुए थे.

डिंको सिंह ने साल 1998 में बैंकॉक एशियाई खेलों में अपना परचम लहराते हुए बॉक्सिंग में स्वर्ण पदक जीता था.

डिंको सिंह भारतीय नौसेना में कार्यरत थे और वे कोच के तौर पर काम करते थे. पिछले कई वर्षों से बीमार होने की वजह से वह घर पर रह रहे थे.

डिंको को एक निडर मुक्केबाज माना जाता था. उन्होंने बैंकॉक एशियाई खेलों में गोल्‍ड मेडल की अपनी राह में दो ओलंपिक पदक विजेताओं थाईलैंड के सोनताया वांगप्राटेस और उज्बेकिस्तान के तैमूर तुलयाकोव को हराया था, जो उस समय किसी भारतीय मुक्केबाज के लिये बड़ी उपलब्धि थी.

भारतीय नौसेना में काम करने वाले डिंको सिंह मुक्केबाजी से संन्यास लेने के बाद कोच बन गये थे. वे भारतीय खेल प्राधिकरण के इम्फाल केंद्र में कोचिंग दिया करते थे लेकिन बीमारी के कारण बाद में अपने घर तक ही सीमित हो गये.

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