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भारत में पहली बार, बेंगलुरु एयरपोर्ट बायोमेट्रिक बोर्डिंग से पहचान सुनिश्चित करेगा

Sep 11, 2018 09:24 IST

    कर्नाटक के बेंगलुरु एयरपोर्ट को पपेरलेस एवं पूरी तरह डिजिटल बनाने की कवायद से आरंभ किये गये अभियान के तहत यहां यात्रियों को बोर्डिंग पास दिखाने की आवश्यकता नहीं होगी. बेंगलुरु का केम्पेगौडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ऐसा करने वाला भारत का पहला एयरपोर्ट बन जाएगा.

    पेपरलेस यात्रा के लिए एयरपोर्ट पर पूरी तैयारी हो चुकी है तथा बोर्डिंग पास के लिए फेस रिकग्निशन (चेहरे की पहचान) का इस्तेमाल वर्ष 2019 से आरंभ होगा. एशियाई देशों में एयरपोर्ट पर बायोमेट्रिक बोर्डिंग तकनीक इस्तेमाल करने वाला पहला देश चीन है.

    बायोमेट्रिक सेल्फ बोर्डिंग के बारे में


    •    पेपरलेस बायोमेट्रिक सेल्फ बोर्डिंग टेक्नॉलजी लॉन्च करने के लिए बेंगलुरु एयरपोर्ट का संचालन करने वाले बैंगलौर इंटरनैशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (बीआईएएल) और विजन-बॉक्स ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं.

    •    बेंगलुरु एयरपोर्ट पर यह सुविधा लागू होने के पहले चरण में जेट एयरवेज, एयर एशिया और स्पाइसजेट के यात्रियों को 2019 की पहली तिमाही में मिलेगी.

    •    बायोमेट्रिक टेक्नॉलजी से यात्रियों के चेहरे से उनकी पहचान होगी और वे एयरपोर्ट पर जा सकेंगे. उन्हें बार-बार बोर्डिंग पास, पासपोर्ट या अन्य आइडेंटिटी डॉक्युमेंट्स नहीं दिखाने पड़ेंगे.

    •    यह समझौता भारतीय मूल के पुर्तगाल के प्रधानमंत्री एंटोनियो कोस्टा की मौजूदगी में किया गया. उनके साथ वहां पुर्तगाल में भारत की राजदूत नंदिनी सिंगला भी मौजूद थीं.

    भारतीय रेल में पहले से है सुविधा

    भारतीय रेलवे पहला सरकारी उपक्रम बना था जिसने अपना कामकाज पेपरलेस किया. अक्टूबर 2011 में आइआरसीटीसी (भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम) ने सुविधा देते हुए कहा कि यात्रियों को अपने साथ काउंटर टिकट रखना जरूरी नहीं होगा. लोग मोबाइल पर एसएमएस या ई-टिकट के जरिए यात्रा कर सकते हैं.



    बायोमेट्रिक बोर्डिंग का लाभ

    पुर्तगाली सॉफ्टवेयर कंपनी विजन बॉक्स की वेबसाइट के अनुसार कंपनी ने पहली बार मार्च 2018  में लॉस एंजेलिस एयरपोर्ट पर यात्रियों के लिए फेस रिकग्निशन का इस्तेमाल किया था. वहां बोर्डिंग पास की बजाय बायोमेट्रिक बोर्डिंग का इस्तेमाल हुआ जिससे यात्रियों को काफी सुविधा मिली है. बायोमेट्रिक बोर्डिंग करने का उद्देश्य यात्रियों की यात्रा को पहले से ज्यादा सरल बनाना है. इससे उन्हें बार-बार बोर्डिंग पास नहीं दिखाना पड़ेगा.

    यह सुविधा पहले से ही कई देशों में उपलब्ध है लेकिन भारत में पहली बार इसे लाया जा रहा है. अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, जापान, चीन, जर्मनी, रूस, आयरलैंड, स्कॉटलैंड, स्विट्जरलैंड, फ्रांस, न्यूजीलैंड, फिनलैंड, हांगकांग, नीदरलैंड, सिंगापुर, आदि देशों में यह सुविधा पहले से ही मौजूद है.


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