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बिमल जालान मुख्य आर्थिक सलाहकार चयन समिति के अध्यक्ष घोषित

Sep 7, 2018 12:41 IST

    केंद्र सरकार ने भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर बिमल जालान को मुख्य आर्थिक सलाहकार चयनित करने हेतु बनाई गयी समिति का अध्यक्ष घोषित किया है. दो माह पूर्व अरविन्द सुब्रमणियन द्वारा पद से इस्तीफ़ा दिए जाने के बाद यह पैनल गठित किया गया है.

    मुख्य आर्थिक सलाहकार चयन समिति

    •    बिमल जालान के अतिरिक्त, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के सचिव सी चंद्रमौली और आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग पैनल के सदस्य होंगे जो साक्षात्कार प्राप्त करने और साक्षात्कार आयोजित करने के लिए कार्यरत होंगे.

    •    प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की नियुक्ति समिति को अगले सीईए की नियुक्ति के लिए मंजूरी देनी होगी.

    •    सुब्रमणियन ने 2019 में अपना कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व ही त्यागपत्र दे दिया था. इसके बाद से वे हार्वर्ड में विजिटिंग प्रोफेसर हैं.

    •    सरकार ने पद के लिए आवेदन की अधिसूचना में सरकारी अधिकारियों को आमंत्रित किया है जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों या भारतीय रिजर्व बैंक के पदों पर काम कर चुके अधिकारियों को आवेदन जमा कराना शामिल हैं.

    •    आवेदन के लिए अधिकतम आयु सीमा 56 साल तय की गई है.

    •    न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री है, वित्त या अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की डिग्री होने पर तरजीह दी जाएगी.

    •    आवेदन करने के इच्छुक सरकारी कर्मचारियों के लिए, आर्थिक शोध में छह साल का अनुभव या आर्थिक सलाह प्रदान करना अनिवार्य कर दिया गया है.

     

    बिमल जालान

    बिमल जालान वर्तमान राज्यसभा के सांसद हैं. वे 22 नवम्बर 1997 से 06 सितंबर 2003 तक भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे. वर्ष 1997 में जब उन्होंने पद संभाला, उस समय विश्व साउथ ईस्ट एशिया मुद्रा संकट से जूझ रहा था और भारतीय अर्थ्व्यवस्था भी इससे अछूती नहीं थी. अपने योग्य नेतृत्व से इन्होंने भारत को इस संकट का शिकार होने से बचाया था.

     

    आर्थिक सलाहकार के कार्य

    •    औद्योगिक नीति के सूत्रीकरण, उत्पादन पर विशेष बल देते हुए सामान्य तौर पर औद्योगिक क्षेत्र संबंधी विदेश व्यापार नीति, द्विपक्षीय और बहुपक्षीय व्यापार संबंधी मुद्दों के साथ-साथ उद्योग से संबंधित कर और शुल्क के संबंध में सलाह देना.

    •    औद्योगिक उत्पादन तथा विकास की प्रवृत्तियों का विश्लेषण करना.

    •    इस कार्यालय के जिम्मे सौंपा गये बहुपक्षीय और द्विपक्षीय मुद्दों का परीक्षण एवं आर्थिक प्रभाव वाली नीतिगत टिप्पणियों का प्रसंस्करण करना.

    •    औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग का योजना एवं लैंगिक बजट बनाना.


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