बजट 2017: आधारभूत संरचना तथा रियल एस्टेट पर प्रभाव

वित्त मंत्री ने 1 फरवरी 2017 को संसद में बजट पेश किया। यहां हम बजट के सभी प्रावधानों के प्रभावों का विश्लेषण कर रहे हैं जो आधारभूत संरचना और रियल एस्टेट सेक्टर से संबंधित हैं।

Created On: Feb 17, 2017 12:57 IST

Budget Impacts on Infrastructure and Real Estate

1 फरवरी, 2017 को संसद में केंद्रीय बजट पेश किया गया। बजट में सस्ते घरों को बुनियादी ढांचे का दर्जा दिया गया है और इसमें रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए कर राहत देने का भी वादा किया गया है। बुनियादी ढांचे और रियल एस्टेट सेक्टर में सरकार द्वारा कुछ सकारात्मक कदम उठाए गए हैं। यहाँ हम रियल एस्टेट और बुनियादी ढांचागत क्षेत्रों में सभी बजट प्रस्तावों के पड़ने वाले प्रभावों के बारे में विस्तृत अध्ययन कर रहे हैं।

1. सड़कों, और रेलवे का बुनियादी ढांचा:

2017 के बजट में सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए कुल 3, 96, 135 करोड़ रुपये का निवेश करना निर्धारित किया गया है। वित्त वर्ष 2017 में संशोधित अनुमान 10 फीसद ज्यादा हो सकता है। सड़कों और राजमार्गों के लिए आवंटन को 52,447 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 64,900 करोड़ तक बढ़ा दिया गया है।
बजट में यह बताया गया कि 2016-17 के दौरान ग्रामीण सड़कों के निर्माण कार्यों में तेजी आई है और 2011-14 जहां एक दिन में 73 किमी सड़कों का निर्माण होता था वहां यह बढ़कर 2016-17 में 133 किमी प्रतिदिन हो गया। वहीं रेलवे के व्यय में 8% की वृद्धि की गयी है और इसे 1,31,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
इन सब के अलावा, 2017-18 में 3500 किमी. रेलवे लाइनों को बिछाने का लक्ष्य रखा गया है, जो 2016-17 में 2800 किमी. था। सौर ऊर्जा के परियोजना उपकरणों का निर्माण करने के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीनरी पर उत्पाद शुल्क में कटौती की गयी है।

प्रभाव: सड़क निर्माण कंपनियों द्वारा भविष्य में नवीन निविदाओं और सड़क परियोजनाओं के माध्यम से सड़क निर्माण में वृद्धि होने के साथ-साथ निश्चित रूप से बेहतरी आएगी।
रेल बजट में वृद्धि करने से उन कंपनियों को फायदा होगा जो ट्रैक बिछाने और विद्युतीकरण सेवाओं को प्रदान करते हैं और सिविल सेवा का कार्य करते हैं।
बुनियादी ढांचे में सीमेंट और इस्पात क्षेत्र का विकास अच्छी तरह से करना होगा क्योंकि ये दो उत्पाद निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले सर्वाधिक उत्पाद हैं।

2) बजट में किफायती आवास के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर को दर्जा दिया गया है
प्रभाव: केंद्रीय बजट 2017-18 में बहुप्रतीक्षित मांग किफायती आवास को  "इन्फ्रास्ट्रक्चर" स्टेट्स प्रदान किया गया है। सरकार के इस कदम का उद्देश्य 2022 तक सभी को आवास (घर) प्रदान करना है। इस कदम से से डेवलपर्स के लिए कैपिटल पहुंच आसान होगी जिससे लंबी अवधि तक परिशोधन दर को कम करने में मदद मिलेगी।  
इस से भी अधिक यह कि यह डेवलपर्स को कर प्रोत्साहन और वायबिलिटी गैप फंडिंग का उपयोग करने की अनुमति देता है। किफायती आवास के उद्देश्य के लिए, इसमें कार्पेट एरिया के क्षेत्र में किए गए बदलाव को एक सकारात्मक बदलाव में गिना गया है। अब सरकार ने किफायती आवास के उद्देश्य से कार्पेट एरिया में बदलाव किया है।
अभी केवल चार महानगरों में 30 वर्गमीटर की सीमा को परिधीय क्षेत्र में शामिल किया है जबकि देश के बाकि बाकी हिस्सों में 60 वर्गमीटर की सीमा लागू होगी।
9 लाख रुपये और 12 लाख रूपये के ऋण पर पर क्रमश: 4% और 3 फीसद की ब्याज सहायता की घोषणा से किफायती आवास के खरीदारों को बढ़ावा मिलेगा।

3) 1 करोड़ घरों का एजेंडा
प्रभाव: भारत में ग्रामीण आवास क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए ग्रामीण प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 230 अरब रुपये निर्धारित किए गये हैं। सरकार का उद्देशय शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में किफायती आवास को बढ़ावा देना है। सरकार की योजना 2019 तक 1 करोड़ घरों का निर्माण करने की है।
वर्तमान में भारत में आवासीय क्षेत्रों में अधिकतर वृद्धि प्रथम औऱ द्वितीय श्रेणी के शहरों में हो रही है। हालांकि, इस योजना से गरीबों के लिए आवश्यक आवास के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और यह ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय सेक्टर को भी बढ़ावा देंगे।

4) बेचने वाली पूर्ण हो चुकी खाली परियोजनाओं पर कल्पित (नोशनल) किराया आय के लिए कर में छूट
प्रभाव: बजट में डेवलपर्स के लिए एक नियम में कर छूट की घोषणा की गयी है। वर्तमान में खाली घर, जिन्हें पूरा होने (कॉम्पलीशन) का प्रमाण पत्र मिल गया है उन्हें काल्पनिक किराये की आय (नोशनल रेंटल इनकम) पर कर देना होता हैं।
नया नियम प्रमाण पत्र प्राप्त करने के एक वर्ष के बाद लागू हो जाएगा। नया कानून डेवलपर्स को अपनी सूची को समाप्त करने के लिए कुछ आवश्यक अनुदान भी प्रदान करेगा।

5) अचल संपत्ति और इंडेक्सेशन के परिवर्तन के लिए होल्डिंग अवधि में कमी की गयी है और इसे 1.4.1981 से 1.4.2001 में स्थानांतरित किया गया है।
प्रभाव: अचल संपत्ति. से लाभ पर विचार करने हेतु धारण अवधि को मौजूदा तीन साल से घटाकर दो साल करने समेत अचल संपत्ति0 सहित आस्तिरयों की सभी श्रेणियों के लिए सूचीकरण के लिए आधार वर्ष भी 1.4.1981 से बदलकर 1.4.2001 किए जाने का प्रस्ताकव किया गया है।
 इस कदम से पूंजीगत लाभ पर देयता काफी घटेगी जबकि परिसंपत्तिियों की गतिशीलता को प्रोत्सादहन मिलेगा। सरकार वित्तीकय लेखा जोखा  के उस समूह का विस्तातर करने की योजना बना रही है जिसमें कर की अदायगी किए बिना पूंजीगत लाभों का निवेश किया जा सके। संपत्ति  के विकास हेतु हस्ता क्षरित सहित करार के लिए परियोजना पूर्ण होने वाले वर्ष में पूंजीगत लाभ कर अदा करने की बाध्यतता उत्प न्ने हो जाएगी।  
प्रस्तावित कराधान प्रावधानों से संपत्ति धारकों को अचल संपत्ति की बिक्री करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा और इससे रियल एस्टेट क्षेत्र में जरूरतमंद लोगों को लाभ मिलेगा।

6) राष्ट्री य आवासीय बैंक (एनएचबी) वर्ष 2017-18 में 20 हजार करोड़ रुपए के व्यसक्ति ‍गत आवासीय ऋणों का पुर्नवि‍त्त करेगा
प्रभाव-राष्ट्री य आवासीय बैंक वर्ष 2017-18 में 20 हजार करोड़ रु. के व्य क्तिय‍गत आवासीय ऋणों का पुर्नवि‍त्त करेगा। विमुद्रीकरण से बैंको में नकदी का प्रवाह बढ़ा है, जिसके चलते बैंको ने आवासीय ऋण समेत अन्य् ऋणों की ऋण दरें पहले ही कम कर दी हैं। वित्तं मंत्री श्री जेटली ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा आवासीय ऋण पर ब्याेज में रियायत की घोषणा पहले ही की जा चुकी है।
सस्ते  आवास अब आधारभूत संरचना का हिस्सां होंगे। इससे घर खरीदने वाले को सस्तेन आवास से जुड़ी परियोजनाओं के आधारभूत संरचना से संबद्ध लाभ प्राप्तस हो सकेंगे।

7) बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं में निवेश में वृद्धि
प्रभाव: इस साल के बजट में 2016 के बजट की कई प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की घोषणा का पालन किया गया है। केंद्रीय बजट 2017 में  बुनियादी ढांचा क्षेत्र के लिए बड़ी मात्रा में बजट आवंटन किया गया है। लगभग 64.9 अरब रूपये राजमार्गों के तथा 1310 बिलियन रूपये रेलवे के लिए आवंटित किए गए हैं, जिसमें 2000 किलोमीटर तटीय रोड शामिल हैं। इसका उद्देश्य मुंबई, कोच्चि, चेन्नई जैसे और अन्य शहरों तथा छोटे शहरों में प्रमुख बंदरगाह शहरों के बीच आवाजाही को बेहतर करना है।

8) संपत्ति के विकास के लिए संयुक्त विकास समझौता (जेडीए) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
प्रभाव: संपत्ति के विकास के लिए संयुक्त विकास समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद, परियोजना के पूरा होने के दौरान पूंजीगत लाभ कर में कटौती की जाएगी।
कई अन्य प्रावधानों के पूंजीगत लाभ कर को कम करने के बावजूद इस कदम से न केवल ज़मींदार को बल्कि बिल्डर / प्रमोटर को कर में राहत मिलेगी । इसलिए यह उनके दायित्व को कम करने में सहायक होगा।

9) 3 लाख रुपए से अधिक (4439 अमेरिकी डॉलर) नगदी रहित लेन-देन का प्रस्तादव।
प्रभाव:वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने अपने बजट भाषण में कहा कि सरकार ने निर्णय लिया है कि 3 लाख से अधिक का लेने-देन नगद में नहीं किया जाएगा। कालाधन समाप्तह करने के लिए विशेष जांच दल द्वारा तीन लाख से अधिक नगदी लेन-देन पर प्रतिबंध लगाने के सुझाव पर वित्त  मंत्री ने वित्तस विधेयक के आयकर अधिनियम में संशोधन का प्रस्ता व किया है।
सरकार भीम ऐप के उपयोग को बढा़वा देने के लिए दो नई योजनाएं यानि व्यंक्तियों के लिए रेफरल बोनस स्की म और व्या पारियों के लिए कैशबैक स्की्म शुरू करेगी। डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए भीम ऐप का शुभारंभ किया गया था और इससे डिजिटल भुगतान और वित्ती य समावेशन के लिए मोबाइल फोनों की शक्ति बढ़ेगी।

10) विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) समाप्त किया जाएगा
प्रभाव: पिछले दो वर्षों के दौरान सरकार ने भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को प्रोत्साहित करने के लिए कई सुधार किए हैं। वर्तमान में कुल एफडीआई का 90 प्रतिशत से अधिक अब स्व चलित जरिए से आता है। इस बजट में अगले वित्तई वर्ष 2017-18 से विदेशी निवेशी संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) को चरणबद्ध तरीके से समाप्तव किया जाएगा।
एफआईपीबी ने एफडीआई संबंधी आवेदनों की ई-फाइलिंग और ऑन लाइन प्रोसेसिंग सफलता पूर्वक कार्यान्वित की है। अब यह ऐसी स्थिति में है कि जहां एफआईपीबी को चरणबद्ध तरीके से समाप्तव किया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय निवेशक राजकोषीय जिम्मेदारी योजना पर प्रगति से संतुष्ट होंगे, जो उन्हें हमेशा के लिए कुछ राहत प्रदान करेगा और यह उनके दृष्टिकोण तथा विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड के उन्मूलन के हिसाब से महत्वपूर्ण है।

11) इनोवेटिव (नवीन) भूमि-पूलिंग तंत्र की शुरूआत
प्रभाव: बजट 2017 में आंध्र प्रदेश के नई राजधानी के विकास के लिए नवीन भूमि-पूलिंग तंत्र की शुरूआत की गई है। आंध्र प्रदेश की नई राजधानी का निर्माण भूमि अधिग्रहण अधिनियम के उपयोग के बिना एक अभिनव (इनोवेटिव) भूमि-पूलिंग तंत्र द्वारा किया जा रहा है। भारत में भूमि अधिग्रहण एक बहुत खास मुद्दा है और बड़े पैमाने पर विकास के लिए एक प्रमुख बाधा बनता जा रहा है।
नई भूमि पूलिंग तंत्र से भूमि संबंधी विवादों को कम करने और विकास की गति बढ़ाने में तेजी से मदद मिलेगी। पूंजीगत लाभ कर की छूट से उन जमीन मालिकों का आत्मविश्वास बढ़ेगा जिनकी जमीन सरकार इस योजना के तहत राजधानी का निर्माण के लिए ले रही है।
हालांकि, यह छूट केवल उनके लिए है जो 2 जून 2014 तक ऐसी भूमि के मालिक थे जब आंध्र प्रदेश राज्य पुनर्गठित किया गया था ।
निष्कर्ष- बुनियादी ढांचा और रियल एस्टेट किसी भी अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर की गुणवत्ता किसी भी अर्थव्यवस्था के विकास की गुणवत्ता निर्धारित करती है और रियल एस्टेट एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है क्योंकि यह लोगों की बुनियादी जरूरत या यूं कहें आवासीय जरूरतों को पूरा करता है।
कुल मिलाकर, यह बजट आधारभूत संरचना और रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक सकारात्मक बजट था। सरकार ने बुनियादी ढांचा और रियल एस्टेट सेक्टर को आगे बढ़ाने की दिशा में एक शानदार कार्य किया है जो आने वाले वर्षों में देश के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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