डीबीटी और आईसीएआर ने कृषि जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान एवं शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग हेतु सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए

जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) का स्‍थापना देश में विभिन्‍न जैव प्रौद्योगिकीय कार्यक्रमों और क्रियाकलापों की योजना बनाने संवर्धन करने और समन्‍वयन करने के लिए की गई है. आईसीएआर, भारत सरकार के कृषि मंत्रालय में कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के तहत एक स्वायत्तशासी संस्था है.

Created On: Jan 16, 2019 15:56 ISTModified On: Jan 16, 2019 16:12 IST

जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने 14 जनवरी 2019 को कृषि जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान एवं शिक्षा के क्षेत्र में विविध विषयों पर अनुसंधान एवं विकास संबंधी गतिविधियों पर बल देने के लिए एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर किये हैं.

डीबीटी ने कृषि जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में जैव प्रौद्योगिकी संबंधी अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए कई गतिविधियों और कार्यक्रमों का दायित्‍व ग्रहण किया है. आईसीएआर देशभर में बागवानी, मत्‍सय और पशुविज्ञान सहित कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और शिक्षा के लिए समन्‍वय, मार्गदर्शन और प्रबंधन कर रहा है.

उद्देश्य:

यह एमओयू कृषि जैव प्रौद्योगिकी, परियोजनाओं के वित्‍त पोषण, नीतिगत मसलों, विनियामक पहलुओं और राष्‍ट्र हित के अन्‍य विशिष्‍ट क्षेत्रों में परस्‍पर स्‍वीकृत अनुसंधान कार्यक्रमों में एक दूसरे के साथ सहयोग के उद्देश्‍य से कार्यान्वित किया जाएगा.

 

मुख्य तथ्य:

   डीबीटी और आईसीएआर द्वारा तैयार की गई सुविधाओं और प्रौद्योगिकी मंच तक राष्‍ट्रीय प्रणालियों की पहुंच बनायी जायेगी और इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए संयुक्‍त कार्य समूह का गठन किया जाएगा.

   आईसीएआर और डीबीटी के बीच एमओयू सहयोग की संभावनाओं का पता लगाने, अभिसारिता तथा कृषि जैव प्रौद्योगिकी के विषयों में अनुसंधान और प्रशिक्षण की गति को बढ़ावा देने तथा उसमें तेजी लाने के लिए परस्‍पर सहयोग से संबंधित है.

   कृषि संबंधी नवाचारों और स्‍टार्टअप्‍स को बढ़ावा देने हेतु सुस्‍थापित बीआईआरएसी व्‍यवस्‍था के माध्‍यम से सहयोग किया जाएगा.

•   देश की कुलीन संस्‍थाओं के साथ नेटवर्किंग के माध्‍यम से इस सामंजस्‍यपूर्ण दृष्टिकोण को मिशन मोड में ग्रहण किया जाएगा.

   इसके विशिष्‍ट उद्देश्‍यों में परस्‍पर स्‍वीकृत प्रमुख राष्‍ट्रीय कार्यक्रमों की योजना बनाना, उनका संयुक्‍त वित्‍त पोषण करना और कृषि जैव प्रौद्योगिकी के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में संसाधनों को साझा करते हुए उन्‍हें संयुक्‍त रूप से लागू करना है.

   आईसीएआर और डीबीटी तथा अन्‍य संगठनों के विशेषज्ञों को शामिल करते हुए साझा थिंक टैंक बनाना, जीनोमिक्स, जीनोटाइपिंग, डाटा बैंकिंग, एग्रीकल्‍चर बायोइन्‍फोर्मेटिक्‍स, जीएम फूड डिटेक्‍शन, विविध प्रौद्योगिकियों के विधिमान्‍यकरण आदि शामिल हैं.

 

यह भी पढ़ें: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओडिशा में 1500 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया

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