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DCGI ने कम लागत के कोविड -19 परीक्षण 'फेलुदा' के वाणिज्यिक शुभारंभ को दी मंजूरी

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के दिशानिर्देशों के अनुसार, TATA CRISPER परीक्षण में 96% संवेदनशीलता और कोरोना वायरस का पता लगाने के लिए 98% विशिष्टता के साथ उच्च गुणवत्ता वाले बेंचमार्क मिले हैं.

Sep 21, 2020 11:01 IST
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ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने इस 19 सितंबर, 2020 को TATA CRISPER (क्लस्टर्ड रेगुलेटरी इंटरसेप्टर शॉर्ट पालिंड्रोमिक रिपीट) के कोविड -19 परीक्षण ’फेलुदा’ के वाणिज्यिक शुभारंभ  को मंजूरी दे दी है. यह खबर वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) द्वारा साझा की गई थी.

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के दिशानिर्देशों के अनुसार, इस परीक्षण में 96% संवेदनशीलता और कोरोना वायरस का पता लगाने के लिए 98% विशिष्टता के साथ उच्च गुणवत्ता वाले बेंचमार्क मिले हैं.

यह TATA CRISPER परीक्षण कोविड -19 का कारण बनने वाले वायरस का सफलतापूर्वक पता लगाने के लिए विशेष रूप से अनुकूलित Ca9 प्रोटीन को तैनात करने वाला दुनिया का पहला नैदानिक ​​परीक्षण होगा.

TATA CRISPER परीक्षण का महत्व

TATA CRISPER परीक्षण पारंपरिक RT-PCR परीक्षणों की सटीकता के स्तर को कम समय में  हासिल करने, उपयोग में आसानी में और बेहतर होने के साथ कम खर्चीले उपकरणों से प्राप्त करेगा. इसके अलावा, CRISPER एक भविष्य की भी तकनीक है जिसे भविष्य में कई अन्य रोगजनकों के पता लगाने के लिए भी तैयार किया जा सकता है.

इसने भारतीय वैज्ञानिक समुदाय के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जो 100 दिनों से भी कम समय में अनुसंधान और विकास से उच्च सटीकता, स्केलेबल और विश्वसनीय परीक्षण के लिए आगे बढ़ रहा है.

मुख्य विशेषताएं

• इस TATA CRSISPER तकनीक को CSIR-IGIB (इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी) द्वारा विकसित किया गया है.

• टाटा समूह ने इस उच्च गुणवत्ता वाले परीक्षण को बनाने के लिए ICMR और CSIR-IGIB के साथ मिलकर काम किया था, जोकि 'मेड इन इंडिया' परीक्षण के साथ राष्ट्र को जल्द ही और आर्थिक रूप से सस्ते, विश्वसनीय, सुरक्षित और सुलभ कोविड ​​-19 परीक्षण को सफल बनाने में मदद करेगा.

• कोविड -19 की जांच के लिए TATA CRISPER परीक्षण को मिलने वाला यह अनुमोदन, कोविड -19 महामारी से लड़ने में देश के प्रयासों को बढ़ावा देगा.

TATA CRISPER टेस्ट क्या है और यह कैसे काम करता है?

CSIR के अनुसार, TATA CRISPER परीक्षण एक स्वदेशी रूप से विकसित, अत्याधुनिक CRISPER तकनीक का उपयोग SARS-CoV-2 वायरस के जीनोमिक अनुक्रम का पता लगाने के लिए करता है. CRISPER रोगों का निदान करने के लिए यह एक जीनोम एडिटिंग तकनीक है.

CSIR-IGIB के निदेशक श्री अनुराग अग्रवाल के अनुसार, जीनोम डायग्नॉस्टिक्स और थैरेप्यूटिक्स के लिए सिकल सेल मिशन के तहत वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) द्वारा शुरू किया गया यह कार्य एक नया ज्ञान पैदा करता है जिससे SARS-CoV-2 के लिए नए नैदानिक ​​परीक्षण को जल्दी विकसित किया जा सकता है.

भारत में अनुसंधान और विकास की क्षमता

गिरीश कृष्णमूर्ति, CEO, टाटा मेडिकल एंड डायग्नोस्टिक लिमिटेड, ने इस विकास पर अपनी टिप्पणी करते हुए यह कहा है कि, इस TATA CRISPER परीक्षण का व्यवसायीकरण देश में जबरदस्त R&D क्षमता को दर्शाता है, जो वैश्विक स्वास्थ्य सेवा और वैज्ञानिक अनुसंधान जगत में भारत के सहयोग को बढ़ाने में अपना योगदान प्रदान कर सकता है.

CSIR-IGIB के निदेशक श्री अनुराग अग्रवाल के अनुसार, इस गतिविधि ने सौविक मैती और देबज्योति चक्रवर्ती के नेतृत्व वाली युवा अनुसंधान टीम के नवाचार के साथ-साथ वैज्ञानिक ज्ञान और प्रौद्योगिकी के परस्पर संबंध को दिखाया है.

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