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सरकार ने युद्ध में हताहत हुए सैनिकों के परिवारों के मुआवजे में 4 गुना बढ़ोतरी की

यह राशि सेना युद्ध हताहत कल्याण कोष (एबीसीडब्ल्यूएफ) से प्रदान किया जायेगा. युद्ध में हताहत होने वाले सभी श्रेणियों के परिवार इस आर्थिक सहायता राशि का लाभ उठा सकेंगे.

Oct 7, 2019 11:57 IST
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केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने युद्ध में हताहत हुए सुरक्षाबलों के परिवार को दिए जाने वाले आर्थिक सहायता राशि में चार गुना बढ़ोतरी की है. इसके साथ ही युद्ध में हताहत होने वाले सभी श्रेणियों हेतु मौजूदा दो लाख रुपये से आठ लाख रुपये तक मुआवजा बढ़ाने को मंजूरी दी गई है.

यह राशि सेना युद्ध हताहत कल्याण कोष (एबीसीडब्ल्यूएफ) से प्रदान किया जायेगा. युद्ध में हताहत होने वाले सभी श्रेणियों के परिवार इस आर्थिक सहायता राशि का लाभ उठा सकेंगे. यह कदम भारतीय सेना की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुये किया गया है. यह मांग सेना लंबे समय से कर रही थी.

इससे पहले, युद्ध में हताहत परिवारों को 60 फीसदी या उससे अधिक दिव्यांगता के लिए दो लाख रुपये और 60 फीसदी से कम दिव्यांगता हेतु एक लाख रुपए की वित्तीय सहायता का प्रावधान था. यह राशि पारिवारिक पेंशन, सेना समूह बीमा, सैन्य कल्याण कोष तथा अनुग्रह राशि से मिलने वाली वित्तीय सहायता के अलावा था.

सेना युद्ध हताहत कल्याण कोष (एबीसीडब्ल्यूएफ)

कई जवानों को युद्ध में हताहत होने के बाद भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग (ईएसडब्ल्यू) ने एबीसीडब्लूएफ का गठन किया था. फरवरी 2016 में सियाचिन में एक दुखद घटना हुई, जब एक हिमस्खलन में दस सैनिक दब गए थे. सेना युद्ध हताहत कल्याण कोष (एबीसीडब्ल्यूएफ) का गठन जुलाई 2017 में किया गया था और इसे अप्रैल 2016 में पूर्वव्यापी रूप से लागू कर दिया गया था.

यह कोष बैटल कैजुअल्टी के तहत बच्चों और परिजनों को मिलने वाली अतिरिक्त अनुग्रह राशि के लिए विभिन्न वर्तमान कल्याण योजनाओं से अलग है. विभिन्न रैंकों हेतु 25 लाख रुपये से 45 लाख रुपये तक की अनुग्रह राशि सहित मौद्रिक अनुदान तथा सेना समूह बीमा के लिए 40 लाख रुपये से लेकर 75 लाख रुपये तक का मौद्रिक अनुदान पहले से मौजूद है.

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इसके अलावा, नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार ने युद्ध में शहीद और घायल अर्धसैनिक बलों के कर्मियों के परिवारों की सहायता हेतु ‘भारत के वीर कोष’ का शुभारंभ किया था. यह कोष बहुत ही कम समय में लोकप्रिय हो गया तथा इसे सबका व्यापक समर्थन मिला.

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