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दिल्ली में वर्ष 2021 तक अपशिष्ट जल को पीने लायक बनाया जायेगा

Jun 22, 2018 10:12 IST

    दिल्ली सरकार द्वारा राज्य में मौजूद जल संकट एवं दूसरे राज्यों पर निर्भरता को देखते हुए अपशिष्ट जल प्रबंधन योजना को मंजूरी प्रदान की है. इसके तहत जल बोर्ड ने ट्रीटेड वॉटर का इस्तेमाल करने की तैयारी शुरू कर दी है.

    दिल्ली जल बोर्ड के चेयरमैन और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में पानी की कमी को दूर करने के लिए 21 जून 2018 को योजना पर काम शुरू करने की मंजूरी दी गई. इस योजना के अंतर्गत शोधित जल को यमुना में छोड़ा जायेगा जिससे यमुना को स्वच्छ जल भी मिलेगा तथा चंद्रावल एवं वजीराबाद प्लांट को पर्याप्त पानी भी मिल सकेगा.

    योजना के मुख्य बिंदु

    •    योजना के अनुसार वर्ष 2021 तक 200 एमजीडी अतिरिक्त पानी दिल्ली को कई माध्यमों से मिलेगा. वर्ष 2019 तक 50 से 60 एमजीडी पानी, 2020 तक 110 एमजीडी और 2021 तक दिल्ली जल बोर्ड 200 एमजीडी पानी की व्यवस्था कर लेगा.

    •    कॉर्नेशन पार्क के सीवरेज ट्रीटेड प्लांट (एसटीपी) से करीब 70 एमजीडी पानी यमुना में हरियाणा बॉर्डर के पास छोड़ा जाएगा.

    •    सोनिया विहार फेज-टू में 50 एमजीडी का वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट भी बनाया जाएगा. इस वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता 140 एमजीडी होगी और यहां गंग नहर से मिलने वाले पानी को ट्रीट किया जाएगा.

    •    इन सभी परियोजनाओं पर आगामी तीन महीने में काम शुरू हो सकता है. मौजूदा समय में दिल्ली अपने विभिन्न ट्रीटमेंट प्लांट से 916 एमजीडी पानी ट्रीट करती है.

    पर्यावरण लाभ भी होगा

    यमुना में छोड़ा गया पानी नदी के बहाव के साथ बहता हुआ दिल्ली की ओर आएगा. इससे पानी प्राकृतिक तरीके से साफ होगा. विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पानी एक किलोमीटर तक नदी में बहता है तो उससे एक यूनिट बीओडी बढ़ जाती है. ऐसे में हरियाणा बॉर्डर से यह पानी करीब 40 किलोमीटर का सफर तय कर वजीराबाद पहुंचेगा, जिससे पानी काफी हद तक साफ हो जाएगा. इस पूरी नदी के पानी को वजीराबाद और चंद्रावल वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में दोबारा साफ किया जाएगा. इससे दोनों प्लांट में रहने वाली पानी की कमी काफी हद तक दूर हो जाएगी.

     

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    पर्यावरण लाभ भी होगा

    यमुना में छोड़ा गया पानी नदी के बहाव के साथ बहता हुआ दिल्ली की ओर आएगा. इससे पानी प्राकृतिक तरीके से साफ होगा. विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पानी एक किलोमीटर तक नदी में बहता है तो उससे एक यूनिट बीओडी बढ़ जाती है. ऐसे में हरियाणा बॉर्डर से यह पानी करीब 40 किलोमीटर का सफर तय कर वजीराबाद पहुंचेगा, जिससे पानी काफी हद तक साफ हो जाएगा. इस पूरी नदी के पानी को वजीराबाद और चंद्रावल वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में दोबारा साफ किया जाएगा. इससे दोनों प्लांट में रहने वाली पानी की कमी काफी हद तक दूर हो जाएगी.

     

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