एटीएम धोखाधड़ी: कैसे अपने कार्ड्स सुरक्षित रखें

भारतीय रिज़र्व बैंक की हालिया अपील, जो की हाल में बड़े पैमाने पर हुए साइबर डेबिट कार्ड हमले को मद्देनज़र रखते हुए ज़ारी की गयी थी अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है| इस हमले में एक अनुमान के मुताबिक हजारों करोड़ रुपए से भी अधिक की चोरी की गयी थी|

Created On: Nov 3, 2016 11:56 ISTModified On: Nov 22, 2016 12:30 IST

भारतीय रिज़र्व बैंक की हालिया अपील, जो की हाल में बड़े पैमाने पर हुए साइबर डेबिट कार्ड हमले को मद्देनज़र रखते हुए ज़ारी की गयी थी अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है| इस हमले में एक अनुमान के मुताबिक हजारों करोड़ रुपए से भी अधिक की चोरी की गयी थी|

इस तरह की चोरियों को रोकने और अपने कार्ड्स को सुरक्षित रखने के लिए हमारे लिए ये जानना अत्यंत आवश्यक है की इस तरह के जालसाज़ कैसे काम करते है और कौन-कौन से अलग तरह की हरकतें करते है|

ऐसे जालसाज़ी के कुछ नमूने नीचें दिए गए हैं जो आपके कार्ड की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं:

कीपैड स्टिकिंग (Keypad sticking )

जालसाज "कैंसल (cancel)" और "इंटर (Enter)" की (key) को चिपका कर या उसके किनारे पर लकड़ी का पतला टुकड़ा (स्टिक) या ब्लेड लगाकर उसे जाम कर देते हैं। पिन डालने के लिए जब कोई ग्राहक 'इंटर/ ओके (Enter/OK)' की दबाता है तो वह ऐसा कर नहीं पाता और सोचता है कि मशीन काम नहीं कर रही है। फिर वह "कैंसल (cancel)"  करने की कोशिश करता है, तब भी लेन– देन (ट्रांजैक्शन) सपाट बना रहता है। ग्राहक के एटीएम से बाहर निकलते ही एटीएम में आने वाला जालसाज पिछली प्रक्रियाओं को दुहराता है. एटीएम में कोई भी लेन– देन करीब 30 सेकेंड (अब और फिर से 20 सेकेंड) तक सक्रिय  रहता है और जालसाज "इंटर (Enter)" की (key) से पेस्ट या स्टिक को हटाकर पैसे निकालने की प्रक्रिया शुरु कर देता है. दुर्भाग्य यह है कि वह सिर्फ एक बार ही पैसे निकाल सकता है और कार्ड को दुबारा स्वैप किए बगैर और फिर से पिन डाले बिना वह और पैसे नहीं निकाल सकता.

विवेकपूर्ण रायः पैसे पाने के लिए किसी भी बाहरी व्यक्ति की सहायता न लें और तब तक एटीएम से बाहर न निकलें जब तक कि लेन–देन की प्रक्रिया खत्म नहीं हो जाती. इस प्रकार की धोखाधड़ी का दायित्व बैंक खुद पर नहीं लेते और इसे कार्डधारक की लापरवाही बता कर मामले से अपना पल्ला झाड़ लेते हैं.

कार्ड स्वैपिंग (Card swapping)

जब कभी ग्राहक किसी व्यापारिक केंद्र में अपने डेबिट कार्ड का प्रयोग करता है, जालसाज (जो पेट्रोल पंप का कर्मचारी या होटल का वेटर या ऐसा ही कोई, हो सकता है) डाले जा रहे पिन को कहीं लिख कर रख लेता है और कार्ड को वापस देते समय दुकान में रखे गए दूसरे डुप्लिकेट कार्ड को उठाते हुए एक बार फिर से मूल कार्ड को स्वैप कर लेता है. कार्ड और पिन दोनों के साथ जालसाज तब तक खाते से पैसे निकाल सकता है जब तक कि कार्डधारक उस कार्ड को ब्लॉक न करवा दे। बैंक अपने ग्राहकों से हमेशा यह सुनिश्चित करने को कहते हैं कि उनका कार्ड हमेशा उनके सामने इस्तेमाल किया जाए, वापस किया जाने वाला कार्ड उनका ही है, यह जांचने के बाद ही कार्ड वापस लें और उनसे ट्रांजैक्शन प्वाइंट टर्मिनल पर पिन न डालने का अनुरोध करता है. गलत तरीके से कार्ड स्वैपिंग होने पर भी बैंक इसका दायित्व नहीं स्वीकार करते.

स्किमिंग (Skimming )

इस प्रकार की धोखाधड़ी अधिक जटिल होती है. छोटा स्किमिंग उपकरण एटीएम के डेबिट कार्ड स्थान पर लगा दिया जाता है जो कार्ड के मैग्नेटिक टेप पर दिए गए डाटा को पढ़ सकता है. एक बाद प्रतिकृति बनाए जाने के बाद डाटा को किसी भी नकली कार्ड पर डाला जा सकता है और उसका इस्तेमाल पैसे निकालने के लिए किया जा सकता है. ग्राहक के खाते का पिन जालसाज द्वारा एटीएम स्टैंड पर लगाए गए छोटे कैमरे से चुरा लिया जाता है. स्किमिंग धोखाधड़ी के जरिए ग्राहकों का अच्छा खासा नुकसान हो जाता है.

किसी भी मामले में ग्राहक को दुरुपयोग के पहले मामले के बाद ही तुरंत अपना कार्ड ब्लॉक कर देना चाहिए.

 

 

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