EU ने जलवायु परिवर्तन पर कड़े नियमों की शुरुआत की, जानें विस्तार से

यूरोपीय संघ के नीति निर्माताओं ने हाल ही में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अपनी सबसे महत्वाकांक्षी योजना का अनावरण किया. इस योजना के पीछे संघ का लक्ष्य दशक में हरित लक्ष्यों को लेकर ठोस कार्रवाई और दुनिया की अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक उदाहरण स्थापित करना है.

Created On: Jul 19, 2021 13:30 ISTModified On: Jul 19, 2021 12:52 IST

यूरोपीय संघ (ईयू) ने इस दशक में जलवायु परिवर्तन का कारण बनने वाली ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में 55 प्रतिशत की कटौती करने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने में सहायता करने के लिए 14 जुलाई 2021 को नए कानून की शुरुआत की. इसमें विदेशी कंपनियों के प्रदूषण उत्सर्जन पर कर लगाने की एक विवादास्पद योजना भी शामिल है.

यूरोपीय संघ के नीति निर्माताओं ने हाल ही में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अपनी सबसे महत्वाकांक्षी योजना का अनावरण किया. इस योजना के पीछे संघ का लक्ष्य दशक में हरित लक्ष्यों को लेकर ठोस कार्रवाई और दुनिया की अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक उदाहरण स्थापित करना है.

मुख्य बिंदु

•    यूरोपीय आयोग, यूरोपीय संघ के कार्यकारी निकाय ने श्रमसाध्य विस्तार से बताया कि, कैसे ब्लॉक के 27 देश 2030 तक 1990 के स्तर से 55 प्रतिशत तक शुद्ध ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के अपने सामूहिक लक्ष्य को पूरा कर सकते हैं. इसे 2050 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन की दिशा में एक कदम के तौर पर देखा जा रहा है.

•    इसका मतलब हीटिंग, परिवहन और निर्माण के लिए कार्बन उत्सर्जन की लागत बढ़ाना होगा. साथ ही उच्च कार्बन विमानन ईंधन और शिपिंग ईंधन पर टैक्स को लागू करना और सीमा पर आयातकों को सीमेंट, स्टील जैसे उत्पाद बनाने में उत्सर्जित कार्बन के लिए चार्ज करना होगा.

•    यूरोपीय संघ के नीति निर्माता जिस तरह अर्थव्यवस्था की रक्षा और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने की, आवश्यकता के साथ औद्योगिक सुधारों को संतुलित करना चाहते हैं. इसके लिए उन्हें व्यापारियों से तीव्र पैरवी का सामना करना पड़ेगा.

•    कुछ पर्यावरण प्रचारकों ने संघ की इस योजना के लेकर कहा कि आयोग बहुत सतर्क है. ग्रीनपीस ईयू के निदेशक जोर्गो रिस ने एक बयान में कहा कि इन नीतियों का जश्न मनाना एक हाई-जम्पर की तरह है जो बार के नीचे दौड़ने के लिए पदक का दावा करता है.

•    यह पूरा पैकेज एक लक्ष्य पर आधारित है जो की बहुत ही कम है और विज्ञान में इसका कोई आधार नहीं है. यह हमारे ग्रह की जीवन-समर्थन प्रणालियों के विनाश को नहीं रोकेगा.

•    विश्व के नेताओं ने छह साल पहले पेरिस में वैश्विक तापमान को दो डिग्री सेल्सियस (3.6 डिग्री फारेनहाइट) से नीचे रखने के लिए सहमति व्यक्त की थी और सदी के अंत तक 1.5 डिग्री सेल्सियस (2.7 एफ) से अधिक नहीं रखने पर जोर दिया गया था.

•    वैज्ञानिकों का कहना है कि जब तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती शुरू करने के लिए कठोर कदम नहीं उठाए जाते, तब तक दोनों लक्ष्यों को प्राप्त करना मुश्किल होगा.

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