Search

मृदा प्रदूषण से मां का दूध भी शुद्ध नहीं रहा: FAO रिपोर्ट

एफएओ की रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्व के बहुत स्थानों पर मां का दूध में भी रासायनिक तत्व पाए हैं और इनका स्तर ऊंचा है जिसे सुरक्षित नहीं माना जाता है. भारत, यूरोप और अफ्रीका के कुछ देश सबसे अधिक प्रभावित हैं.

May 3, 2018 10:13 IST

विश्व खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा मृदा प्रदूषण रिपोर्ट (Soil Pollution: A Hidden Reality) जारी की गई. इस रिपोर्ट के अनुसार उपज वृद्धि के लिए उपयोग किये जा रहे कीट नाशकों के कारण मृदा प्रदूषण अत्यधिक बढ़ गया है जो मानव स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रहा है.

विश्व खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) रिपोर्ट में कहा गया है कि मृदा प्रदूषण का स्तर मानव स्वास्थ्य के कितना प्रतिकूल है इसका सटीक अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता.

मृदा प्रदूषण से मां के दूध पर प्रभाव

•    एफएओ रिपोर्ट में मृदा प्रदूषण के प्रमुख कारकों में कीटनाशक, औद्योगिक अपशिष्ट, रेडियोएक्टिव कचरा, घरेलू कचरे का मिट्टी में निदान, अम्लीय वर्षा आदि शामिल हैं.

•    उपज बढ़ाने के लिए कीटनाशकों तथा अन्य रासायनों के इस्तेमाल से कृषि उत्पादों में प्रदूषण होने से भारत, यूरोप और अफ्रीका के कुछ देशों में कई स्थानों पर मां का दूध भी पूरी तरह शुद्ध नहीं रह गया है.

•    रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्व के बहुत स्थानों पर मां का दूध में भी रासायनिक तत्व पाए हैं और इनका स्तर ऊंचा है जिसे सुरक्षित नहीं माना जाता है.

•    यह कीटनाशक अथवा रासायनिक तत्व हमारे भोजन के माध्यम से शरीर तक पहुँचते हैं जिससे पाचन तंत्र तथा मां का दूध भी प्रभावित होता है.

मृदा प्रदूषण का विश्व में प्रभाव

•    रिपोर्ट के अनुसार आस्ट्रेलिया में लगभग 80 हजार स्थान मृदा प्रदूषण से प्रभावित है.

•    चीन की 16 प्रतिशत भूमि और 19 प्रतिशत कृषि भूमि प्रदूषित है.

•    यूरोपीय और बालकान देशों में 30 लाख स्थान और अमेरिका में 1300 स्थल मृदा प्रदूषण से प्रभावित हैं.

•    एफएओ की रिपोर्ट में कहा गया कि दुनिया भर में मृदा प्रदूषण से कृषि उत्पादकता, खाद्य सुरक्षा और मानव स्वास्थ्य को जबरदस्त खतरा पैदा हो गया है.

 

मृदा प्रदूषण के कारण

    प्रभाव

नियंत्रण के उपाय

कीटनाशकों और उर्वरकों के उपयोग

मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव

कीटनाशकों या उर्वरकों पर नियंत्रण, अन्य तरीके

परमाणु संयंत्रों, ई-कचरे से रेडियोधर्मी पदार्थ

कैंसर जैसे गंभीर रोग

ई-कचरे के उचित निदान का प्रबंध किया जाना चाहिए

अम्लीय वर्षा

मिट्टी में पीएच (PH) स्तर का बढ़ना

वनों की कटाई पर रोक

औद्योगिक अपशिष्ट

मिट्टी का विषैला होना, फसलों को नुकसान

नदियों, तालाबों और झीलों में औद्योगिक अपशिष्ट पर रोक, निदान के उपाय

खुले में मलत्याग

विभिन्न बीमारियां तथा मृदा प्रदूषण

शौचालयों का निर्माण, जन-जागृति के उपाय

 

एफएओ रिपोर्ट के अनुसार मृदा प्रदूषण के कारण

•    एफएओ रिपोर्ट (Soil Pollution: A Hidden Reality) के अनुसार औद्योगिकीकरण, युद्ध, खनन और कृषि के लिए इस्तेमाल किये गये रसायनों से दुनिया भर में मृदा प्रदूषण बढ़ा है.

•    बढ़ते शहरीकरण ने मृदा प्रदूषण की इस समस्या को और बढ़ा दिया है. इसमें शहरी कचरे की व्यापक भूमिका है.

•    बांग्लादेश में 2007 की तुलना में 2012 में कीटनाशकों का उपयोग चार गुना बढ़ा है जबकि रवांडा एवं इथोपिया में इसका प्रयोग 10 गुना बढ़ा है.

•    आवश्यकता से अधिक कीटनाशकों का उपयोग करने से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. उदहारण के रूप में अनियंत्रित छिड़काव से आस-पास की मानव बस्तियों तथा पशु-पक्षियों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.  

•    एफएओ की उप-महानिदेशक मारिया हेलेन सेमेदो ने यह रिपोर्ट पेश की तथा कहा कि खाद्य पदार्थ, पेयजल, वायु और वातावरण प्रदूषित हो गया है.

•    इस खतरे का आकलन करने के लिए अभी तक कोई विस्तृत अध्ययन नहीं किया गया है, इसलिए इस संकट अंदाजा नहीं लग पा रहा है.

 

दिल्ली विश्व का छठा सर्वाधिक प्रदूषित शहर: डब्ल्यूएचओ


संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन (FAO)

खाद्य और कृषि संगठन (FAO) संयुक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी विशेषज्ञता प्राप्त एजेंसियों में से एक है जिसकी स्थापना वर्ष 1945 में कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए तथा ग्रामीण आबादी के जीवन स्तर में सुधार करने के लिए की गई थी.

यह संगठन खाद्य एवं कृषि संबंधी ज्ञान और जानकारियों के आदान-प्रदान करने का मंच भी है. इसके साथ-साथ यह इन क्षेत्रों में विभिन्न देशों के अधिकारियों के प्रशिक्षण की व्यवस्था भी करता है. विकासशील देशों में कृषि के विकास में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण है. इसका मुख्यालय रोम, इटली में मौजूद है.