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वित्त मंत्रालय ने 'हाई रिस्क' वाली फाइनैंस कंपनियों की सूची जारी की

Feb 27, 2018 10:13 IST

    वित्त मंत्रालय के अधीन काम करनेवाली संस्था फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (एफआईयू) ने करीब 9,500 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (एनबीएफसी) की एक सूची जारी की है जिन्हें 'हाई रिस्क फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशंस' बताया गया है. इस सूची में इन एनबीएफसी के नाम शामिल हैं जिन्हें 'हाई रिस्क' कैटिगरी में रखा गया है.

    मुख्य तथ्य:

    •    एफआईयू ने अपनी जांच में पाया है कि इन कंपनियों ने 31 जनवरी तक मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट के नियमों का पालन नहीं किया था.

    •    8 नवंबर 2016 को हुई नोटबंदी के बाद कई नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों पर आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय की खास नजर थी, क्योंकि इन कंपनियों पर काला धन रखने वालों की मदद करते हुए उनके पुराने नोट बदलवाने का संदेह था.

    •    उस समय भी कई एनबीएफसी और सहकारी बैंकों को पुराने नोटों को अवैध तरीके से नए नोटों में बदलवाने में शामिल पाया गया था.

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    •    इन कंपनियों और सहकारी बैंकों ने काले धन को बैक डेट की एफडी दिखाकर चेक जारी कर दिए, जबकि रिजर्व बैंक ने इन्हें ऐसे डिपॉजिट्स लेने से साफ मना किया था.

    •    प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत सभी एनबीएफसी के लिए फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन में एक प्रमुख अधिकारी की नियुक्ति जरूरी है और 10 लाख रुपये या इससे अधिक के सभी संदिग्ध लेन-देन की जानकारी एफआईयू को देना अनिवार्य है.

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    •    पीएमएलए के सेक्शन 12 के तहत हरेक रिपोर्टिंग एंटिटि के लिए सभी लेनदेन के रिकॉर्ड्स रखने और निर्देशों के मुताबिक अपने ग्राहकों एवं लाभ पाने वालों की पहचान की पुष्टि एफआईयू से करना जरूरी है. ऐक्ट में इन एंटिटिज को लेनदेन के और क्लायंट्स की पहचान के रिकॉर्ड्स पांच साल तक रखने को कहा गया है.

    नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (एनबीएफसी):

    नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी उस कंपनी को कहते हैं जो कंपनी अधिनियम, 1956 के अंतर्गत पंजीकृत हो. इसका मुख्य कारोबार उधार देना, विभिन्न प्रकार के शेयरों, स्टॉक, बांड्स, डिबेंचरों, प्रतिभूतियों, पट्टा कारोबार, किराया-खरीद(हायर-पर्चेज), बीमा कारोबार, चिट संबंधी कारोबार में निवेश करना हैं.  किसी नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी में ऐसी कोई संस्था शामिल नहीं है जिसका मुख्य कारोबार कृषि, औद्योगिक, व्यापार संबंधी गतिविधियां हैं अथवा अचल संपत्ति का विक्रय, क्रय या निर्माण करना है.

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